“नई कार खरीदते समय एक्सीडेंट की स्थिति में इंश्योरेंस कवर, डीलर की भूमिका और मालिक की जिम्मेदारी पर फोकस। दिल्ली थार हादसे जैसे उदाहरण से समझें कि मरम्मत कौन करवाता है, साथ ही कानूनी विकल्प और क्लेम प्रक्रिया।”
नई कार खरीदने के बाद अगर शोरूम से बाहर निकलते ही एक्सीडेंट हो जाए, तो मरम्मत की जिम्मेदारी मुख्य रूप से इंश्योरेंस कंपनी पर आती है, बशर्ते पॉलिसी सक्रिय हो। भारत में मोटर व्हीकल एक्ट के तहत हर नई कार डीलर द्वारा इंश्योरेंस के साथ बेची जाती है, जिसमें पहले साल का प्रीमियम खरीदार से लिया जाता है। अगर एक्सीडेंट मालिक की गलती से हुआ, तो ओन डैमेज कवर के तहत क्लेम किया जा सकता है, जहां डिडक्टिबल (आमतौर पर 1,000 से 2,000 रुपये) मालिक को चुकाना पड़ता है।
दिल्ली में सितंबर 2025 में हुआ महिंद्रा थार हादसा इसका जीता-जागता उदाहरण है। 27 लाख रुपये कीमत वाली नई थार डिलीवरी रिचुअल के दौरान एक्सेलरेटर दबने से शोरूम की पहली मंजिल से गिर गई, जिससे कार को भारी नुकसान पहुंचा। यहां इंश्योरेंस कंपनी ने मरम्मत का अधिकांश खर्च उठाया, क्योंकि पॉलिसी डिलीवरी से पहले ही एक्टिव थी। हालांकि, शोरूम की संपत्ति (जैसे ग्लास पैनल) के नुकसान के लिए डीलर ने कस्टमर से मुआवजा मांगा, जो वाहन इंश्योरेंस से कवर नहीं होता।
अगर एक्सीडेंट थर्ड पार्टी की गलती से हुआ, तो उनकी इंश्योरेंस कंपनी मरम्मत का भुगतान करती है। डीलर की जिम्मेदारी तब तक सीमित रहती है, जब तक कार पूरी तरह हैंडओवर नहीं हुई हो। अगर डिलीवरी से पहले डैमेज हुआ, तो डीलर का स्टॉक इंश्योरेंस या ट्रांजिट इंश्योरेंस कवर करता है। लेकिन शोरूम से बाहर निकलने के बाद, मालिक जिम्मेदार होता है।
एक्सीडेंट सिनेरियो और जिम्मेदारी
| सिनेरियो | जिम्मेदार पक्ष | क्लेम प्रक्रिया | संभावित खर्च |
|---|---|---|---|
| शोरूम के अंदर या डिलीवरी से पहले | डीलर | डीलर का इंश्योरेंस क्लेम, मालिक को कोई खर्च नहीं | पूरा कवर, कोई डिडक्टिबल नहीं |
| शोरूम से बाहर, मालिक की गलती | इंश्योरेंस कंपनी (ओन डैमेज) | इंश्योरेंस को सूचित करें, सर्वेयर बुलाएं, कैशलेस रिपेयर | डिडक्टिबल 1,000-2,000 रुपये, जीरो-डेप्रिशिएशन ऐड-ऑन से फुल कवर |
| थर्ड पार्टी की गलती | थर्ड पार्टी इंश्योरेंस | FIR दर्ज करें, क्लेम फाइल करें | कोई डिडक्टिबल नहीं, लेकिन प्रक्रिया लंबी |
| शोरूम संपत्ति डैमेज | मालिक या थर्ड पार्टी | अलग क्लेम, वाहन इंश्योरेंस से बाहर | 10,000 से 50,000 रुपये तक, केस पर निर्भर |
IRDAI गाइडलाइंस के मुताबिक, नई कारों में जीरो-डेप्रिशिएशन कवर आम है, जो पार्ट्स की वैल्यू घटाए बिना फुल रिपेयर कवर देता है। रेडिट और टीम-बीएचपी फोरम्स पर यूजर्स के अनुभव बताते हैं कि पहले महीने में एक्सीडेंट होने पर डीलर क्लेम प्रोसेस में मदद करता है, लेकिन खर्च इंश्योरेंस से ही आता है। अगर एक्सेसरीज (जैसे आफ्टरमार्केट) फिट हैं, तो उन्हें पॉलिसी में मेंशन न करने पर क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
क्लेम करने के स्टेप्स
तुरंत इंश्योरेंस कंपनी को कॉल करें और एक्सीडेंट डिटेल्स दें।
फोटो लें, FIR दर्ज कराएं अगर थर्ड पार्टी इन्वॉल्व हो।
ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर पर कार ले जाएं; कैशलेस ऑप्शन से डायरेक्ट पेमेंट।
डीलर से संपर्क करें, वे पेपरवर्क में सपोर्ट देते हैं।
अगर डिडक्टिबल ज्यादा है, तो नेगोशिएट करें या ऐड-ऑन चुनें।
ऐसे केसों में मालिक को कानूनी मदद लेनी चाहिए अगर डीलर या इंश्योरेंस असहयोग करे। कंज्यूमर फोरम में शिकायत दर्ज कर मुआवजा मांगा जा सकता है, जैसा कि बॉम्बे के एक कस्टमर ने मारुति डीलर से नेगोशिएट कर डिडक्टिबल कम किया।
Disclaimer: यह लेख सामान्य सूचना के लिए है और कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं माना जाए। पेशेवर सलाह के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करें।