8th Pay Commission: बजट के बीच कर्मचारी संगठन ने दी 12 फरवरी को हड़ताल की धमकी, 8वें वेतन आयोग में की ये डिमांड.

“केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग की शर्तों में बदलाव की मांग की है, जिसमें 50% DA को बेसिक पे में मर्ज करना, 20% अंतरिम राहत और OPS की बहाली शामिल है। 12 फरवरी को एक दिवसीय हड़ताल की धमकी दी गई है, जो बजट 2026 के बीच आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है। आयोग की सिफारिशें 2027 तक आने की उम्मीद है, लेकिन प्रभावी तिथि 1 जनवरी 2026 से मानी जा रही है, जिससे 1.1 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनधारकों को लाभ मिलेगा।”

8वें वेतन आयोग की पृष्ठभूमि और गठन केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 8वें वेतन आयोग का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग को 18 महीनों में अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है, जो मई 2027 तक पूरी हो सकती है। आयोग का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों की समीक्षा करना है। 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गई, इसलिए नई सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि फिटमेंट फैक्टर 2.85 से 3.20 तक हो सकता है, जो वर्तमान 2.57 से अधिक होगा। इससे न्यूनतम वेतन में 20-30% की वृद्धि संभव है। आयोग की सिफारिशें लागू होने पर सरकारी खर्च में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बोझ बढ़ सकता है, जो GDP के 0.5% के बराबर है।

कर्मचारी संगठनों की हड़ताल की धमकी कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉयीज़ एंड वर्कर्स (CCGEW) ने कैबिनेट सेक्रेटरी को नोटिस जारी कर 12 फरवरी 2026 को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी है। यह धमकी बजट 2026 की प्रस्तुति के बीच आई है, जो 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश की जाएगी। संगठन का कहना है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो लाखों कर्मचारी काम पर नहीं आएंगे, जिससे सरकारी कार्यालयों, रेलवे, डाक और अन्य सेवाओं में व्यवधान हो सकता है। CCGEW ने कहा कि 8वें आयोग की देरी से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है, और अंतरिम राहत की कमी से महंगाई का बोझ सहन करना मुश्किल हो रहा है। हड़ताल से जुड़े नियमों के अनुसार, ‘डाइज नॉन’ लागू हो सकता है, जिससे भाग लेने वाले कर्मचारियों की सैलरी कट सकती है, लेकिन संगठन ने इसे अनदेखा करने का फैसला किया है।

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मुख्य मांगें और विवरण कर्मचारी संगठनों ने 10 प्रमुख मांगें रखी हैं, जो 8वें वेतन आयोग की शर्तों (ToR) में बदलाव पर केंद्रित हैं। ये मांगें निम्नलिखित हैं:

ToR में संशोधन : आयोग की शर्तों को कर्मचारियों की सुझावों के आधार पर बदलना, जिसमें वेतन संरचना की व्यापक समीक्षा शामिल हो।

50% DA का मर्जर : महंगाई भत्ते के 50% हिस्से को बेसिक पे में जोड़ना, जो वर्तमान DA दर 50% से अधिक होने पर स्वतः लागू होना चाहिए।

20% अंतरिम राहत : 1 जनवरी 2026 से कर्मचारियों और पेंशनधारकों को 20% अंतरिम राहत प्रदान करना, जब तक आयोग की सिफारिशें लागू नहीं होतीं।

OPS की बहाली : न्यू पेंशन स्कीम (NPS) को रद्द कर पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) बहाल करना, जो पेंशन की गारंटी देती है।

रिक्त पदों पर भर्ती : सरकारी विभागों में लाखों रिक्तियों को भरना और प्राइवेटाइजेशन रोकना।

आउटसोर्सिंग पर रोक : कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थायी करना।

HRA और TA में बढ़ोतरी : हाउस रेंट अलाउंस और ट्रांसपोर्ट अलाउंस में संशोधन, शहरों के आधार पर।

मेडिकल सुविधाएं : CGHS और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं का विस्तार।

बोनस और इंसेंटिव : प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस में वृद्धि।

महिला कर्मचारियों के लिए सुविधाएं : चाइल्ड केयर लीव और अन्य लाभों में सुधार।

ये मांगें 4.5 मिलियन कर्मचारियों और 6.8 मिलियन पेंशनधारकों को प्रभावित करेंगी।

संभावित वेतन वृद्धि और एरियर कैलकुलेशन विशेषज्ञों के अनुसार, 8वें आयोग से वेतन में औसत 25-35% वृद्धि हो सकती है। यहां कुछ स्तरों के लिए अनुमानित एरियर और नई सैलरी का टेबल दिया गया है (फिटमेंट फैक्टर 2.85 पर आधारित):

पे लेवलवर्तमान न्यूनतम बेसिक पे (रुपये)अनुमानित नया न्यूनतम बेसिक पे (रुपये)12-18 महीनों का एरियर (अनुमानित, रुपये)प्रभावित कर्मचारियों की संख्या (लाखों में)
लेवल 118,00051,3001,50,000-2,00,00015
लेवल 529,20083,2202,50,000-3,50,00020
लेवल 1056,1001,60,0005,00,000-7,00,00010
लेवल 141,44,2004,11,00010,00,000-15,00,0005

ये आंकड़े महंगाई दर और आर्थिक स्थिति पर निर्भर हैं। यदि फिटमेंट फैक्टर 3.20 तक जाता है, तो वृद्धि 40% तक पहुंच सकती है। एरियर 2026 से 2027 तक की अवधि के लिए दिए जाएंगे, जो एकमुश्त भुगतान के रूप में हो सकता है।

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