कार की बड़ी टचस्क्रीन 2025 में बढ़ा रही ड्राइविंग खतरा: डिस्ट्रैक्शन से दुर्घटनाएं 42% ज्यादा, फिजिकल बटन क्यों लौटें?

“कारों में बढ़ती टचस्क्रीन ड्राइविंग के दौरान ध्यान भटका रही हैं, जिससे लेन ड्रिफ्ट 42% अधिक हो रहा है और दुर्घटना का जोखिम 50% तक बढ़ जाता है। हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि टचस्क्रीन पर टास्क पूरा करने में फिजिकल बटन से ज्यादा समय लगता है, जबकि भारत में 2025 में सड़क दुर्घटनाओं से 1.6 लाख से ज्यादा मौतें हुईं, जिनमें डिस्ट्रैक्शन प्रमुख कारण है। यूरोपीय रेगुलेटर्स अब टचस्क्रीन वाली कारों को टॉप सेफ्टी रेटिंग देने से मना कर रहे हैं, और ऑटोमेकर्स फिजिकल बटन की ओर लौट रहे हैं।”

कारों में बड़ी टचस्क्रीन का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन ये ड्राइवरों का ध्यान सड़क से हटाकर दुर्घटना का जोखिम बढ़ा रही हैं। एक हालिया स्टडी में पाया गया कि टचस्क्रीन इस्तेमाल करते समय ड्राइवर लेन से 42% ज्यादा भटकते हैं, जिससे क्रैश की संभावना बढ़ जाती है। ग्लोबल रिपोर्ट्स के मुताबिक, टचस्क्रीन पर साधारण टास्क जैसे वॉल्यूम एडजस्ट या नेविगेशन सेट करने में फिजिकल बटन से दोगुना समय लगता है, क्योंकि इसमें आंखें सड़क से हटानी पड़ती हैं। भारत में जहां सड़क दुर्घटनाएं पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर हैं, वहां ये टचस्क्रीन अतिरिक्त खतरा पैदा कर रही हैं।

डिस्ट्रैक्शन के प्रकारों को देखें तो टचस्क्रीन विजुअल और कॉग्निटिव डिस्ट्रैक्शन दोनों बढ़ाती हैं। एक रिपोर्ट में सामने आया कि आधुनिक कारों की टेक्नोलॉजी दुर्घटना जोखिम को 50% तक बढ़ा देती है, क्योंकि ड्राइवर स्क्रीन पर नजर रखते हुए स्टीयरिंग कंट्रोल खो देते हैं। यूरो NCAP जैसी सेफ्टी एजेंसियां अब चेतावनी दे रही हैं कि टचस्क्रीन वाली कारों को टॉप रेटिंग नहीं मिलेगी, क्योंकि फिजिकल बटन और नॉब्स से ड्राइवर बिना देखे ऑपरेट कर सकता है। उदाहरण के तौर पर, Tesla और Hyundai जैसी कंपनियां अपनी नई मॉडल्स में टचस्क्रीन पर निर्भर हैं, लेकिन Volkswagen और BMW अब फिजिकल कंट्रोल्स को वापस ला रही हैं।

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भारत में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति चिंताजनक है, जहां 2025 में 4.5 लाख से ज्यादा एक्सीडेंट रिकॉर्ड हुए, जिनमें डिस्ट्रैक्शन एक प्रमुख फैक्टर रहा। सरकारी डेटा से पता चलता है कि दिल्ली जैसे शहरों में फेटल एक्सीडेंट 4.2% बढ़े, और देशभर में मोबाइल या इन-कार स्क्रीन यूज से जुड़े केस बढ़ रहे हैं। एक इंडियन रिपोर्ट में उल्लेख है कि टचस्क्रीन ड्राइवरों का ध्यान हटाकर क्रैश रिस्क बढ़ाती हैं, खासकर हाई-स्पीड हाईवे पर जहां सेकंड्स का फर्क जानलेवा हो सकता है।

फिजिकल बटन की जरूरत को समझने के लिए स्टडीज पर गौर करें: एक टेस्ट में पाया गया कि फिजिकल स्विच से टास्क 20-30 सेकंड में पूरा होता है, जबकि टचस्क्रीन पर 45-60 सेकंड लगते हैं। इसका कारण हैप्टिक फीडबैक की कमी है, जहां ड्राइवर को बटन छूकर पता चल जाता है, लेकिन स्क्रीन पर बार-बार देखना पड़ता है। ऑटोमेशन और डिजिटलाइजेशन पर रिसर्च दिखाती है कि पार्शियल ऑटोमेटेड व्हीकल्स में भी टचस्क्रीन डिस्ट्रैक्शन बढ़ाती है, खासकर कंस्ट्रक्शन जोन या ट्रैफिक में।

टचस्क्रीन vs फिजिकल बटन: तुलनात्मक विश्लेषण

पैरामीटरटचस्क्रीनफिजिकल बटन
ऑपरेशन टाइम45-60 सेकंड (टास्क पर निर्भर)20-30 सेकंड
डिस्ट्रैक्शन लेवलहाई (आंखें सड़क से हटती हैं)लो (हैंड्स-ऑन फील)
सेफ्टी इम्पैक्टलेन ड्रिफ्ट 42% ज्यादास्थिर ड्राइविंग, कम क्रैश रिस्क
यूजर फीडबैकनो हैप्टिक, सिर्फ विजुअलटच फीडबैक, इंट्यूटिव
लागत और डिजाइनसस्ता, मल्टी-फंक्शनमहंगा लेकिन लंबे समय में सुरक्षित

इस टेबल से साफ है कि फिजिकल बटन न सिर्फ तेज हैं बल्कि ड्राइवर को सड़क पर फोकस रखने में मदद करते हैं। ग्लोबल ट्रेंड्स में देखें तो 2025 में डिस्ट्रैक्टेड ड्राइविंग से 3,240 मौतों की अनुमानित संख्या है, जिसमें इन-कार टेक बड़ा रोल खेल रही है। भारत में जहां रोड इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी चुनौतीपूर्ण है, वहां टचस्क्रीन अतिरिक्त बोझ डाल रही हैं।

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डिस्ट्रैक्शन कम करने के प्रमुख तरीके

वॉयस कमांड्स का इस्तेमाल : Android Auto या Apple CarPlay जैसे सिस्टम्स में वॉयस से कंट्रोल करें, जिससे स्क्रीन टच कम हो।

HUD डिस्प्ले : हेड-अप डिस्प्ले से इंफॉर्मेशन विंडशील्ड पर दिखती है, आंखें सड़क से नहीं हटतीं।

एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस : ADAS फीचर्स जैसे लेन कीप असिस्ट टचस्क्रीन डिस्ट्रैक्शन को बैलेंस करते हैं।

रेगुलेटरी चेंजेस : यूरोप की तरह भारत में भी सेफ्टी रेटिंग्स में फिजिकल कंट्रोल्स को प्राथमिकता दें।

ऑटोमेकर्स की रिस्पॉन्स : कंपनियां अब हाइब्रिड अप्रोच अपनाएं, जहां क्रिटिकल फंक्शंस फिजिकल बटन से हों।

इन तरीकों से डिस्ट्रैक्शन 11-15% तक कम हो सकती है, जैसा कि हालिया टेलीमैटिक्स डेटा से पता चलता है। भारत में जहां 47% ड्राइवर ड्राइविंग के दौरान कॉल रिसीव करते हैं, वहां टचस्क्रीन को मोबाइल डिस्ट्रैक्शन से जोड़कर देखना जरूरी है।

भारत में बढ़ते जोखिम के आंकड़े

भारत में सड़क दुर्घटनाओं में डिस्ट्रैक्शन का हिस्सा बढ़ रहा है। 2025 में कुल एक्सीडेंट्स में से 25% डिस्ट्रैक्टेड ड्राइविंग से जुड़े थे, जो ग्लोबल एवरेज से ज्यादा है। दिल्ली में फेटल एक्सीडेंट्स 1,617 पहुंचे, जबकि देशभर में इंजरीज 4.43 लाख से ज्यादा। ऑटो इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स सुझाव दे रहे हैं कि नई कार मॉडल्स में फिजिकल बटन को अनिवार्य बनाया जाए, खासकर EV सेगमेंट में जहां टचस्क्रीन स्टैंडर्ड हैं।

फिजिकल बटन की वापसी का ट्रेंड तेज हो रहा है, क्योंकि रिसर्च दिखाती है कि टचस्क्रीन पर निर्भरता ड्राइविंग स्किल्स को खराब करती है। एक स्टडी में पाया गया कि पार्शियल ऑटोमेटेड मोड में भी टचस्क्रीन यूज से ड्राइवर रिस्पॉन्स टाइम धीमा हो जाता है। भारत जैसे देश में जहां ट्रैफिक डेंस है, ये सेकंड्स जान बचा सकती हैं। ऑटोमेकर्स को अब सेफ्टी प्रायोरिटी बनानी होगी, वरना रेगुलेटर्स सख्त कदम उठाएंगे।

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भविष्य की दिशा: हाइब्रिड कंट्रोल्स

भविष्य में कारें हाइब्रिड कंट्रोल सिस्टम अपनाएंगी, जहां टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट के लिए और फिजिकल बटन क्रिटिकल फंक्शंस जैसे एसी, लाइट्स के लिए होंगे। यह अप्रोच डिस्ट्रैक्शन को 30% तक कम कर सकती है, जैसा कि टेस्टिंग में देखा गया। भारत में जहां 5G और स्मार्ट कारें बढ़ रही हैं, वहां सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को अपडेट करना जरूरी है।

Disclaimer: This is a news report with tips based on recent studies and reports.

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