स्लीपर बसों में आग लगने पर बड़ा फैसला: अब केवल अधिकृत कंपनियां ही बनाएंगी कोच, 6 महीने में 145 मौतें

“पिछले 6 महीनों में स्लीपर कोच बसों से जुड़ी आग की 6 बड़ी घटनाओं में 145 यात्रियों की जान चली गई। केंद्र सरकार ने यात्री सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सख्त नियम लागू किए, जिसके तहत अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल ऑटोमोबाइल कंपनियां या केंद्र से मान्यता प्राप्त संस्थान ही कर सकेंगे। मौजूदा बसों में भी फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, हैमर और ड्राइवर ड्रोजीनेस इंडिकेटर अनिवार्य होंगे।”

स्लीपर बसों की सुरक्षा पर सख्त कदम

केंद्र सरकार ने स्लीपर कोच बसों में लगातार हो रही आग की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की कि अब से स्लीपर बसों का निर्माण केवल वही ऑटोमोबाइल कंपनियां या केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त सुविधाएं कर सकेंगी।

यह कदम उन अनियमितताओं को रोकने के लिए उठाया गया है, जहां स्थानीय बॉडी बिल्डर्स सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते थे। जांच में पाया गया कि कई बसों में इमरजेंसी खिड़कियां गायब या खराब थीं, फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी थी और स्टाफ को आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण नहीं था।

पिछले 6 महीनों में दर्ज 6 प्रमुख आग की घटनाओं में कुल 145 लोगों की मौत हुई, जिसमें राजस्थान के जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर अक्टूबर 2025 में 20 से ज्यादा यात्रियों के जिंदा जलने की घटना प्रमुख है। इसी तरह कर्नाटक के चित्रदुर्ग में दिसंबर 2025 में ट्रक से टक्कर के बाद स्लीपर बस में आग लगी, जिसमें कई यात्री फंसकर जले। आंध्र प्रदेश के कुरनूल और अन्य राज्यों में भी ऐसी ही भयानक घटनाएं सामने आईं।

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नए नियमों के तहत AIS-052 बस बॉडी कोड को सख्ती से लागू किया जाएगा, जो सितंबर 2025 से संशोधित रूप में प्रभावी है। यह कोड बसों की संरचना, डिजाइन और सुरक्षा आवश्यकताओं को सुनिश्चित करता है।

मौजूदा बसों के लिए अनिवार्य अपग्रेड

सरकार ने पहले से चल रही स्लीपर बसों को भी अपडेट करने का आदेश दिया है। इनमें निम्नलिखित सुरक्षा फीचर्स लगाना जरूरी होगा:

फायर डिटेक्शन और अलार्म सिस्टम

इमरजेंसी एग्जिट के साथ हैमर

इमरजेंसी लाइटिंग

ड्राइवर ड्रोजीनेस (नींद आने की चेतावनी) इंडिकेटर

ये उपाय यात्रियों को आग लगने पर तुरंत निकलने का मौका देंगे और ड्राइवर की थकान से होने वाले हादसों को कम करेंगे।

मुख्य बिंदु एक नजर में

निर्माण: केवल केंद्र मान्यता प्राप्त ऑटोमोबाइल कंपनियां

लागू होने का उद्देश्य: आग की घटनाओं में कमी, यात्री सुरक्षा बढ़ाना

पिछले 6 महीने: 6 बड़ी घटनाएं, 145 मौतें

पुरानी बसें: रेट्रोफिटिंग अनिवार्य (फायर सिस्टम, एग्जिट, इंडिकेटर)

मानक: AIS-052 बस बॉडी कोड सख्ती से लागू

यह फैसला लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए राहत लेकर आया है, खासकर त्योहारी सीजन और नाइट जर्नी में जहां स्लीपर बसें सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।

Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट वर्तमान घटनाओं और सरकारी घोषणाओं पर आधारित है। यात्रा से पहले बस ऑपरेटर से सुरक्षा मानकों की पुष्टि करें।

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