“फर्जी ई-चालान SMS स्कैम में साइबर ठग सरकारी पोर्टल की नकल कर बैंक डिटेल्स चुरा रहे हैं, हालिया मामलों में दिल्ली और बेंगलुरु में लाखों की ठगी हुई; असली मैसेज की पहचान TRAI हेडर और आधिकारिक लिंक से करें, जबकि फर्जी लिंक APK या ब्राउजर फिशिंग से बचें; साइबर पुलिस ने 36+ नकली वेबसाइट्स का पता लगाया है।”
साइबर ठगों ने ट्रैफिक ई-चालान को हथियार बनाकर लाखों लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हालिया घटनाओं में, दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में एक 65 वर्षीय व्यक्ति को फर्जी SMS के जरिए 500 रुपये के चालान का बहाना देकर 2,49,246 रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। ठगों ने SMS में एक लिंक भेजा, जिस पर क्लिक करने के बाद पीड़ित की क्रेडिट कार्ड डिटेल्स चुरा ली गईं और मिनटों में अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन कर दिए गए, जिसमें सऊदी रियाल में भी भुगतान शामिल था। इसी तरह, बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड में एक 57 वर्षीय टेक प्रोफेशनल को 2.3 लाख रुपये का नुकसान हुआ, जब उन्होंने फर्जी मैसेज में दिए लिंक पर क्लिक कर चालान चेक करने की कोशिश की। उत्तराहल्ली में एक अन्य व्यक्ति को 3.03 लाख रुपये गंवाने पड़े। ये मामले जनवरी 2026 में ही दर्ज हुए हैं, जो दर्शाते हैं कि स्कैम की रफ्तार तेज हो रही है।
ठग अब ब्राउजर-बेस्ड फिशिंग का सहारा ले रहे हैं, जहां फर्जी वेबसाइट्स सरकारी RTO पोर्टल की हूबहू नकल करती हैं। साइबर सिक्योरिटी फर्मों ने 36 से अधिक ऐसी नकली साइट्स का पता लगाया है, जो Aadhaar, PAN, जन्मतिथि और बैंक कार्ड डिटेल्स मांगती हैं। ये साइट्स SMS या WhatsApp के जरिए भेजी जाती हैं, जैसे “ट्रैफिक चालान BH5065678749 के लिए 3000 रुपये बकाया है, देखने के लिए echallan.live/app पर जाएं।” क्लिक करने पर यूजर को फर्जी पोर्टल पर ले जाया जाता है, जहां पेमेंट गेटवे की आड़ में CVV और OTP चुराया जाता है। कुछ मामलों में, APK फाइल डाउनलोड करवाई जाती है, जो मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल कर फाइनेंशियल डेटा चुराती है।
स्कैम की बढ़ती घटनाओं के पीछे संगठित गिरोह हैं, जो मल्टी-इंडस्ट्री फिशिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये ठग सरकारी ब्रांडिंग का दुरुपयोग करते हैं, जैसे RTO या परिवहन मंत्रालय के लोगो का इस्तेमाल। जनवरी 2026 में ही, पंचकूला पुलिस ने अलर्ट जारी किया कि ऐसे मैसेज में लिंक सरकारी लगते हैं लेकिन फर्जी होते हैं। ठगों का तरीका मनोवैज्ञानिक दबाव डालना है, जैसे “तुरंत भुगतान करें वरना कानूनी कार्रवाई होगी” या “आपका वाहन जब्त किया जाएगा।” इससे यूजर जल्दबाजी में क्लिक कर देते हैं।
असली और फर्जी मैसेज की पहचान कैसे करें? TRAI ने स्पष्ट दिशानिर्देश दिए हैं कि असली मैसेज में SMS हेडर के अंत में -P (प्रमोशनल), -S (सर्विस), -T (ट्रांजेक्शनल) या -G (गवर्नमेंट) होता है। अगर मैसेज में ये नहीं है या अज्ञात नंबर से आया है, तो इसे फर्जी मानें। असली ई-चालान केवल आधिकारिक परिवहन पोर्टल echallan.parivahan.gov.in से ही चेक करें। कभी भी SMS या WhatsApp लिंक पर क्लिक न करें। अगर शक हो, तो 1930 पर साइबर क्राइम हेल्पलाइन कॉल करें।
स्कैम के विभिन्न रूपों को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:
| स्कैम का प्रकार | विशेषताएं | खतरा स्तर | बचाव का तरीका |
|---|---|---|---|
| SMS-आधारित फिशिंग | अज्ञात नंबर से चालान नंबर और लिंक भेजा जाता है, जैसे “चालान 08-12-2025 का 3000 रुपये बकाया” | उच्च, बैंक डिटेल्स चोरी | लिंक न खोलें, आधिकारिक साइट पर वाहन नंबर से चेक करें |
| WhatsApp APK स्कैम | PDF या APK फाइल अटैचमेंट, जो मैलवेयर इंस्टॉल करती है | अति उच्च, फोन हैकिंग | अटैचमेंट न डाउनलोड करें, एंटी-वायरस ऐप यूज करें |
| ब्राउजर-बेस्ड फेक पोर्टल | URL सरकारी जैसा लगता है, लेकिन डोमेन फर्जी (जैसे echallan.live बजाय parivahan.gov.in) | मध्यम से उच्च, ID चोरी | URL को माउस ओवर कर चेक करें, HTTPS प्रमाणित हो |
| ईमेल-आधारित अलर्ट | “Urgent” या “Account Block” जैसे शब्द, ZIP फाइल अटैच | उच्च, डेटा थेफ्ट | ईमेल एड्रेस वेरीफाई करें, ऑफिशियल हेल्पलाइन से पुष्टि लें |
ये स्कैम अब मल्टी-चैनल हो गए हैं, जहां ठग SMS, WhatsApp और ईमेल का कॉम्बिनेशन यूज करते हैं। उदाहरण के लिए, एक मैसेज में चालान डिटेल्स के साथ वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर शामिल कर विश्वसनीयता बढ़ाई जाती है। दिसंबर 2025 में साइबर रिसर्च टीमों ने पाया कि ये गिरोह शेयर्ड फ्रॉड इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रहे हैं, जो बैंकिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी टारगेट करता है। ठगी के बाद, पैसे अंतरराष्ट्रीय रूटिंग से विदेशी अकाउंट्स में ट्रांसफर किए जाते हैं, जैसे सऊदी अरब या अन्य देशों में।
बचाव के लिए प्रमुख टिप्स:
हमेशा आधिकारिक ऐप या वेबसाइट यूज करें: Parivahan Sewa ऐप डाउनलोड कर वाहन डिटेल्स चेक करें।
दो-स्तरीय प्रमाणीकरण सक्रिय रखें: बैंक अकाउंट और UPI में 2FA ऑन करें।
संदिग्ध मैसेज रिपोर्ट करें: TRAI के Chakshu पोर्टल पर या 1930 पर।
फोन में सिक्योरिटी ऐप इंस्टॉल करें: जैसे Avast या Norton, जो फिशिंग लिंक ब्लॉक करते हैं।
परिवार को जागरूक करें: बुजुर्गों और कम टेक-सेवी लोगों को ऐसे मैसेज से दूर रहने की सलाह दें।
अगर ठगी हो गई: तुरंत बैंक को सूचित करें, कार्ड ब्लॉक करवाएं और FIR दर्ज कराएं।
स्कैम के प्रभाव को कम करने के लिए सरकारी प्रयास भी तेज हो रहे हैं। पुलिस विभाग नियमित अलर्ट जारी कर रहे हैं, जैसे “फर्जी लिंक पर क्लिक न करें, केवल echallan.parivahan.gov.in यूज करें।” जनवरी 2026 में ही, कई शहरों में साइबर पुलिस ने स्पेशल ड्राइव चलाई, जिसमें फर्जी वेबसाइट्स को ब्लॉक किया गया। लेकिन यूजर की सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि ठग नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं, जैसे वीडियो कॉल या AI-जनरेटेड वॉयस का इस्तेमाल।
अंत में, याद रखें कि असली ट्रैफिक डिपार्टमेंट कभी भी पर्सनल डिटेल्स SMS से नहीं मांगता। अगर मैसेज में “तुरंत क्लिक करें” जैसा दबाव है, तो इसे इग्नोर करें। ऐसे स्कैम से बचकर अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रखें।
Disclaimer: यह लेख समाचार, रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है, जो सूचना प्रदान करने के उद्देश्य से है। किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।