“यह लेख इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने के जोखिम को कम करने के लिए पांच महत्वपूर्ण उपायों पर केंद्रित है, जिसमें बैटरी स्वास्थ्य जांच, प्रमाणित चार्जिंग उपकरण का उपयोग, पार्किंग सावधानियां, सॉफ्टवेयर अपडेट और आपातकालीन तैयारी शामिल हैं। हाल की घटनाओं जैसे उत्तर प्रदेश में Mahindra BE.6 की आग, जो पंक्चर टायर से हुई, को उदाहरण के रूप में लेकर व्यावहारिक सलाह दी गई है।”
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती लोकप्रियता के साथ, भारत में इनकी बिक्री 2025 में 15 लाख यूनिट्स से अधिक पहुंच गई, लेकिन आग की घटनाएं भी सुर्खियां बटोर रही हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के गुलावठी में Mahindra BE.6 EV में लगी आग, जो बैटरी की बजाय लंबे समय तक पंक्चर टायर पर चलने से हुई, ने मालिकों को सतर्क किया। इसी तरह, नवंबर 2025 में हैदराबाद के NTR स्टेडियम में एक EV में आग लगी, जो पास की गाड़ी तक फैल गई, और राजस्थान के कोटा में एक EV शोरूम में 50 से अधिक वाहन जलकर राख हो गए। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि सही रखरखाव और सावधानियां EV को सुरक्षित रख सकती हैं। यहां पांच जरूरी बातें हैं, जिन्हें हर EV मालिक को अपनाना चाहिए।
1. बैटरी स्वास्थ्य की नियमित जांच करवाएं
EV की बैटरी आग का प्रमुख कारण बन सकती है यदि उसमें क्षति या ओवरहीटिंग हो। बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) की जांच हर 10,000 किलोमीटर पर करवाएं, खासकर अगर आप Tata Nexon EV या MG ZS EV जैसे मॉडल चला रहे हैं। हाल की रिपोर्टों से पता चलता है कि 2025-2026 में भारत में 20% EV आग की घटनाएं बैटरी डैमेज से जुड़ी थीं। बैटरी तापमान 60°C से ऊपर न जाने दें, और अगर कोई असामान्य सूजन या लीक दिखे, तो तुरंत अधिकृत सर्विस सेंटर पर ले जाएं। ठंडे मौसम में बैटरी दक्षता 20-30% कम हो सकती है, इसलिए प्री-हीटिंग फीचर का उपयोग करें।
| बैटरी स्वास्थ्य जांच के पैरामीटर | क्या जांचें | कितनी बार |
|---|---|---|
| तापमान स्तर | 40-50°C के बीच रखें | हर चार्जिंग के बाद |
| वोल्टेज बैलेंस | सेल्स में असमानता न हो | हर 3 महीने |
| क्षति संकेत | दरारें या लीक | दैनिक निरीक्षण |
| BMS अपडेट | सॉफ्टवेयर संस्करण | वार्षिक |
यह जांच न केवल आग के जोखिम को 50% तक कम करती है, बल्कि बैटरी लाइफ को 20% बढ़ाती है।
2. केवल प्रमाणित चार्जिंग उपकरण का उपयोग करें
गैर-प्रमाणित चार्जर EV आग की 40% घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। हमेशा UL या BIS प्रमाणित Level 2 चार्जर इस्तेमाल करें, जैसे कि Ather या ChargePoint के। घर पर चार्जिंग के लिए समर्पित सर्किट इंस्टॉल करवाएं, जो 16A से अधिक करंट हैंडल कर सके। ओवरचार्जिंग से बचें – बैटरी 80% तक चार्ज करें, खासकर गर्म मौसम में जहां तापमान 35°C से ऊपर हो। हाल की घटना में, एक EV शोरूम में चार्जिंग के दौरान आग लगी क्योंकि वायरिंग ओवरलोड थी। ठंडे मौसम में चार्जिंग स्पीड 30% कम हो सकती है, इसलिए धैर्य रखें और कभी एक्सटेंशन कॉर्ड न इस्तेमाल करें।
डूज : चार्जिंग से पहले केबल की जांच करें, गैरेज में चार्ज करें जहां वेंटिलेशन अच्छा हो।
डोंट्स : बारिश में खुले में चार्ज न करें, या अनऑथराइज्ड वर्कशॉप में मरम्मत न करवाएं।
चार्जिंग के दौरान EV को अनअटेंडेड न छोड़ें, क्योंकि थर्मल रनअवे की शुरुआत 10 मिनट में हो सकती है।
3. पार्किंग और ड्राइविंग में सावधानियां बरतें
EV को ज्वलनशील सामग्री के पास पार्क न करें, जैसे कि पेट्रोल पंप या सूखी घास। Mahindra BE.6 घटना में, पंक्चर टायर पर 10 किलोमीटर चलने से घर्षण से आग लगी, जो बैटरी तक पहुंच गई। टायर प्रेशर हमेशा 32-35 PSI रखें, और अगर फ्लैट टायर हो, तो तुरंत रोकें। बाढ़ वाले इलाकों में EV ड्राइव न करें, क्योंकि पानी बैटरी शॉर्ट सर्किट का कारण बन सकता है – 2025 में भारत में 5 ऐसी घटनाएं दर्ज हुईं। रीजेनरेटिव ब्रेकिंग का उपयोग करें, जो ब्रेक पैड घिसाव को 40% कम करता है और ओवरहीटिंग रोकता है।
| पार्किंग सावधानियां | जोखिम | बचाव उपाय |
|---|---|---|
| स्थान चयन | ज्वलनशील सामग्री | कंक्रीट फ्लोर पर पार्क करें |
| मौसम प्रभाव | बारिश/बाढ़ | ऊंचे स्थान चुनें |
| दूरी रखना | अन्य वाहनों से | 2 मीटर अंतर रखें |
| निरीक्षण | टायर/बॉडी | दैनिक चेकअप |
ये उपाय EV की सुरक्षा को 70% बढ़ाते हैं, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां पार्किंग सीमित है।
4. सॉफ्टवेयर अपडेट को कभी नजरअंदाज न करें
EV के ऑनबोर्ड सॉफ्टवेयर बैटरी मॉनिटरिंग और सेफ्टी फीचर्स को नियंत्रित करते हैं। OTA अपडेट हर 3 महीने में चेक करें, जैसे कि Tesla या Hyundai Ioniq मॉडल्स में। 2025 में, अपडेट न करने से जुड़ी 10% EV आग की घटनाएं हुईं। अपडेट से BMS बेहतर काम करता है, जो थर्मल रनअवे को 90% तक रोक सकता है। अगर अपडेट उपलब्ध हो, तो Wi-Fi कनेक्टेड गैरेज में इंस्टॉल करें, और अपडेट के दौरान EV को चार्ज न करें।
लाभ : बेहतर डायग्नोस्टिक्स, जो बैटरी स्वास्थ्य को रीयल-टाइम ट्रैक करता है।
उदाहरण : Mahindra की हालिया क्लैरिफिकेशन में, सेफ्टी सिस्टम ने आग को बैटरी तक सीमित रखा।
अपडेट न करने से EV की वारंटी प्रभावित हो सकती है, और जोखिम बढ़ जाता है।
5. आपातकालीन तैयारी और रखरखाव को प्राथमिकता दें
EV में आग लगने पर CO2 या ड्राई केमिकल एक्सटिंग्विशर रखें, क्योंकि पानी बैटरी रिएक्शन को बढ़ा सकता है। हर EV मालिक को फायर ड्रिल प्रैक्टिस करनी चाहिए – दरवाजे अनलॉक होते ही बाहर निकलें। अधिकृत सर्विस सेंटर पर सालाना रखरखाव करवाएं, जहां जेनुइन पार्ट्स इस्तेमाल होते हैं। 2026 में भारत सरकार के नए EV सेफ्टी गाइडलाइन्स के तहत, बैटरी टेस्टिंग अनिवार्य हो गई है। अगर दुर्घटना हो, तो EV को 48 घंटे मॉनिटर करें, क्योंकि डिले थर्मल रनअवे संभव है।
ये तैयारी न केवल जान बचाती है, बल्कि EV बीमा क्लेम को आसान बनाती है।
| आपातकालीन किट आइटम्स | उपयोग | उपलब्धता |
|---|---|---|
| फायर एक्सटिंग्विशर | आग बुझाना | कार में रखें |
| इंसुलेटेड ग्लव्स | हैंडलिंग | सर्विस किट में |
| वार्निंग ट्रायंगल | सड़क पर अलर्ट | अनिवार्य |
| इमरजेंसी कॉन्टैक्ट | हेल्पलाइन | मोबाइल ऐप में |
Disclaimer: यह लेख विभिन्न रिपोर्टों, टिप्स और स्रोतों पर आधारित है।