“ट्रंप प्रशासन के टैरिफ और रूसी तेल पर विवाद के बावजूद भारत का निर्यात सेक्टर लचीला साबित हुआ है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि जनवरी में माल और सेवाओं का निर्यात सकारात्मक रहेगा, मर्चेंडाइज निर्यात स्थिर है और सेवाएं मजबूत प्रदर्शन कर रही हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल निर्यात 850 अरब डॉलर पार करने की उम्मीद है।”
ट्रंप टैरिफ बवाल हो या रूसी तेल का विवाद नहीं बिगाड़ पाया कुछ, सरकार ने की जनवरी में अच्छे निर्यात की उम्मीद
वाणिज्य मंत्रालय के उच्चाधिकारियों ने संकेत दिया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत का निर्यात प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ और रूसी तेल आयात पर उत्पन्न विवादों के बावजूद निर्यात में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि चालू वर्ष में अब तक माल और सेवाओं का निर्यात सकारात्मक वृद्धि दर्ज कर रहा है और जनवरी का डेटा भी पॉजिटिव रहने की उम्मीद है।
मर्चेंडाइज निर्यात स्थिरता दिखा रहा है, जबकि सेवाएं क्षेत्र लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान मर्चेंडाइज निर्यात 2.44% बढ़कर 330.29 अरब डॉलर पहुंच गया। कुल निर्यात (माल और सेवाएं) में भी स्थिरता बनी हुई है। जनवरी 2025 के आंकड़ों में कुल निर्यात 74.97 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान था, जो पिछले साल की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।
ट्रंप टैरिफ के प्रभाव को देखते हुए, अमेरिका पर निर्भर निर्यात में चुनौतियां आईं, लेकिन भारत ने अन्य बाजारों में विविधीकरण किया। इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स और सेवाओं जैसे क्षेत्रों ने मजबूती दिखाई। रूसी तेल पर अमेरिकी दबाव के कारण कुछ समय के लिए आयात में उतार-चढ़ाव आया, लेकिन इससे निर्यात पर सीधा असर नहीं पड़ा। भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाया, जिससे निर्यात सेक्टर पर नकारात्मक प्रभाव कम हुआ।
वाणिज्य मंत्रालय की उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025-26 में माल और सेवाओं का कुल निर्यात 850 अरब डॉलर को पार कर जाएगा, जो पिछले वर्ष के 825 अरब डॉलर से अधिक है। यह लक्ष्य सेवाओं के मजबूत प्रदर्शन और मर्चेंडाइज में स्थिरता पर आधारित है।
मुख्य निर्यात क्षेत्रों का प्रदर्शन
इलेक्ट्रॉनिक गुड्स : निर्यात में लगातार वृद्धि, विशेष रूप से अमेरिका और अन्य बाजारों में।
फार्मास्यूटिकल्स : उच्च मांग बनी हुई, वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति।
इंजीनियरिंग गुड्स : स्थिर निर्यात, विविध बाजारों में विस्तार।
सेवाएं : आईटी, सॉफ्टवेयर और अन्य सेवाओं में मजबूत वृद्धि, कुल निर्यात का महत्वपूर्ण हिस्सा।
व्यापार घाटे की स्थिति
जनवरी में आयात में वृद्धि से व्यापार घाटा बढ़ा, लेकिन निर्यात की सकारात्मक वृद्धि ने इसे संतुलित रखा। अप्रैल-जनवरी अवधि में कुल निर्यात में 7.21% की वृद्धि दर्ज की गई।
सरकार निर्यात बढ़ावा देने के लिए विविधीकरण, नए व्यापार समझौतों और घरेलू उत्पादन पर फोकस कर रही है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय निर्यातक लचीले साबित हो रहे हैं।