“टाटा ट्रस्ट्स में मेहली मिस्त्री ने वाइस चेयरमैन पदों को समाप्त करने की मांग उठाई है, क्योंकि ट्रस्ट डीड में इस पद का कोई प्रावधान नहीं है। यह पद पिछले कानूनी विवाद के दौरान बनाया गया था और अब इसकी प्रासंगिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। फैसला चेयरमैन नोएल टाटा के हाथ में है, जिससे ट्रस्ट्स की गवर्नेंस संरचना पर नया बहस छिड़ सकती है।”
टाटा ट्रस्ट्स में खड़ा हो सकता है नया विवाद
टाटा ट्रस्ट्स के गवर्नेंस में एक बार फिर हलचल मच गई है। टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (TEDT) के ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने सभी टाटा ट्रस्ट्स में वाइस चेयरमैन पदों को खत्म करने का औपचारिक प्रस्ताव रखा है। उनका मुख्य तर्क यह है कि ट्रस्ट डीड में ऐसे पद का कोई उल्लेख नहीं है और यह भूमिका मूल दस्तावेजों के अनुरूप नहीं है।
मेहली मिस्त्री ने इस मुद्दे को ट्रस्ट बोर्ड के सामने उठाया है, जहां उन्होंने कहा कि वाइस चेयरमैन का पद पिछले कानूनी विवादों के समय बनाया गया था, जब रतन टाटा के साथ जुड़े मामलों में स्थिरता लाने के लिए यह व्यवस्था की गई थी। अब जब ट्रस्ट्स में नई नेतृत्व व्यवस्था स्थापित हो चुकी है, तो ऐसे पदों की जरूरत नहीं रह गई है। उनका मानना है कि यह पद ट्रस्ट की मूल भावना से मेल नहीं खाता और इसे समाप्त कर ट्रस्ट डीड के अनुसार साफ-सुथरी संरचना अपनानी चाहिए।
TEDT के वर्तमान ट्रस्टी बोर्ड में चेयरमैन नोएल टाटा, विजय सिंह, वेणु श्रीनिवासन, जहांगिर मिस्त्री और मेहली मिस्त्री शामिल हैं। मेहली मिस्त्री सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) से पिछले साल अक्टूबर 2025 में पुनर्नियुक्ति न मिलने के बाद बाहर हो चुके हैं, लेकिन TEDT और अन्य कुछ संबद्ध संस्थाओं जैसे टाटा मेडिकल सेंटर कोलकाता तथा ब्रिच कैंडी हॉस्पिटल मुंबई में उनकी मौजूदगी बनी हुई है।
यह मांग ऐसे समय में आई है जब टाटा ट्रस्ट्स में गवर्नेंस को लेकर पहले से ही चर्चाएं चल रही हैं। पिछले साल अक्टूबर में मेहली मिस्त्री की पुनर्नियुक्ति पर बोर्ड में मतभेद हुए थे, जहां नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह जैसे प्रमुख ट्रस्टी उनके खिलाफ वोट डाले गए थे। इसके बाद मेहली मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास कैविएट दाखिल कर निष्पक्ष सुनवाई की मांग की थी, लेकिन बाद में उन्होंने विवाद को बढ़ाने से बचते हुए ट्रस्ट्स से अलग होने का फैसला किया और इसे संस्था की प्रतिष्ठा बचाने के लिए जरूरी बताया।
वाइस चेयरमैन पदों पर उठे सवाल ट्रस्ट्स की संरचना को सीधे प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल SDTT और SRTT में वाइस चेयरमैन के रूप में वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह जैसे नाम प्रमुख हैं। मेहली मिस्त्री का तर्क है कि ट्रस्ट डीड मूल रूप से चेयरमैन-केंद्रित व्यवस्था पर आधारित है और अतिरिक्त पद ट्रस्ट की परोपकारी प्रकृति से विचलन पैदा कर सकते हैं।
ट्रस्ट्स के अंदर यह बहस ट्रस्ट डीड की व्याख्या पर केंद्रित है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो बोर्ड को ट्रस्ट डीड की समीक्षा करनी पड़ सकती है या महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस 2025 के तहत नए नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा, जिसमें लाइफटाइम ट्रस्टी की संख्या बोर्ड की कुल ताकत का एक-चौथाई से अधिक नहीं हो सकती।
फैसला अब टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के पास है। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने इस मुद्दे पर विचार करने की बात कही है, लेकिन कोई अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया। यदि पद समाप्त होते हैं तो यह टाटा ग्रुप की परोपकारी इकाइयों में सादगी और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम माना जा सकता है। वहीं, यदि पद बने रहते हैं तो गवर्नेंस पर और बहस छिड़ सकती है।
यह घटनाक्रम टाटा ट्रस्ट्स की स्थिरता और रतन टाटा की विरासत को बनाए रखने की चुनौती को एक बार फिर उजागर करता है, जहां संस्थागत हितों और व्यक्तिगत मतभेदों का संतुलन बनाना जरूरी हो गया है।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और वर्तमान घटनाक्रमों पर आधारित है। इसमें कोई निवेश सलाह या कानूनी राय नहीं है।