पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज (PSX) के बेंचमार्क KSE-100 इंडेक्स में सोमवार को रिकॉर्ड एक दिवसीय गिरावट दर्ज की गई, जहां इंडेक्स 16,089 अंक या 9.57% टूटकर 151,973 पर बंद हुआ। यह गिरावट मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों और अफगानिस्तान सीमा पर तनाव से उपजी अस्थिरता के कारण आई, जिससे निवेशकों में भयंकर panic selling देखी गई। ट्रेडिंग बीच में रोकनी पड़ी, लेकिन रिकवरी सीमित रही। भारतीय बाजारों में भी गिरावट आई, लेकिन Sensex और Nifty में महज 1.2-1.3% की गिरावट रही, जो पाकिस्तान की तुलना में काफी कम है।
पाकिस्तान का शेयर बाजार भारी संकट में
पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज (PSX) में सोमवार को अभूतपूर्व तबाही मची, जब बेंचमार्क KSE-100 इंडेक्स पिछले सत्र के 168,062 अंकों से 16,089 अंक या 9.57% की रिकॉर्ड गिरावट के साथ 151,972.99 पर बंद हुआ। इंट्राडे में यह 151,747.95 तक गिरा, जो एक सिंगल सेशन में सबसे बड़ी पॉइंट्स गिरावट है। KSE-30 इंडेक्स भी 9.8% तक टूटा, जिसके बाद ट्रेडिंग एक घंटे के लिए रोक दी गई।
यह गिरावट मुख्य रूप से क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ी है। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर सैन्य हमलों से मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति बन गई, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत की खबरों ने पाकिस्तान में प्रो-ईरान विरोध प्रदर्शन भड़का दिए। कराची और इस्लामाबाद समेत कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए, जिसमें दर्जनों मौतें और संपत्ति का नुकसान हुआ। साथ ही अफगानिस्तान सीमा पर चल रही सैन्य कार्रवाई ने निवेशकों का भरोसा पूरी तरह डगमगा दिया।
निवेशकों ने बड़े पैमाने पर बिकवाली की, जिससे मार्केट कैपिटलाइजेशन में अरबों रुपये का नुकसान हुआ। विश्लेषकों का कहना है कि leveraged पोजीशंस और फंड्स की बिकवाली ने गिरावट को और तेज किया। पिछले एक महीने में KSE-100 पहले ही 18.78% गिर चुका है, जबकि सालाना आधार पर यह अभी भी 35.55% ऊपर है, लेकिन जनवरी 2026 के ऑल-टाइम हाई 191,032 से अब काफी नीचे आ गया है।
भारत के बाजारों से तुलना: 10 गुना कम प्रभाव
भारतीय शेयर बाजार भी वैश्विक अस्थिरता से प्रभावित हुए, लेकिन गिरावट काफी नियंत्रित रही। Sensex 1,048 अंक या 1.29% गिरकर 80,238.85 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 313 अंक या 1.24% टूटकर 24,865.70 पर आ गया। यह गिरावट मुख्य रूप से क्रूड ऑयल कीमतों में उछाल और ग्लोबल रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट से आई, लेकिन पाकिस्तान की तुलना में यह काफी कम है।
KSE-100 गिरावट : 9.57% (16,089 अंक)
Sensex गिरावट : 1.29% (1,048 अंक)
Nifty गिरावट : 1.24% (313 अंक)
पाकिस्तानी बाजार की गिरावट भारतीय बाजारों से लगभग 10 गुना ज्यादा गंभीर रही, जो सीधे तौर पर पड़ोसी देश की आर्थिक संवेदनशीलता और क्षेत्रीय तनाव से जुड़े जोखिम को दर्शाता है। भारत में मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक्स, विदेशी निवेश और विविधीकृत अर्थव्यवस्था ने झटके को सहने में मदद की।
सेक्टर-वाइज प्रभाव और निवेशक रिएक्शन
पाकिस्तान में बैंकिंग, एनर्जी और टेक्सटाइल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। बड़े निवेशकों और विदेशी फंड्स ने भारी बिकवाली की। ट्रेडिंग वॉल्यूम 479 मिलियन शेयर्स तक पहुंचा, जो सामान्य से काफी ज्यादा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट तनाव बढ़ता रहा तो पाकिस्तान का बाजार और गहराई में जा सकता है। हालांकि कुछ ब्रोकर्स ने इसे ओवररिएक्शन बताया और लॉन्ग-टर्म में रिकवरी की उम्मीद जताई।
आगे क्या?
पाकिस्तान सरकार और PSX को निवेशक भरोसा बहाल करने के लिए कदम उठाने होंगे। ग्लोबल मार्केट्स में भी अस्थिरता बनी हुई है, लेकिन भारत जैसे बाजारों में रिकवरी की संभावना ज्यादा मजबूत दिख रही है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि ऐसे समय में रिस्क मैनेजमेंट और डाइवर्सिफिकेशन पर फोकस करें।