मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान के ड्रोन हमलों के कारण कतर में LNG उत्पादन ठप होने से वैश्विक गैस कीमतें आसमान छू रही हैं। एशियाई स्पॉट LNG कीमतें 25.40 डॉलर प्रति मिलियन BTU तक पहुंच गईं, जबकि यूरोपीय बेंचमार्क 40-50% तक उछलीं। भारत में Petronet LNG, Mahanagar Gas, GAIL और Adani Total Gas जैसे शेयरों में 4-9% तक की गिरावट आई है, क्योंकि आयात महंगा होने से घरेलू सप्लाई पर दबाव बढ़ा है।
होली के दिन लाल हुए LNG कंपनियों के शेयर, मिडिल ईस्ट संकट से 9.6% तक लुढ़के; कतर में शटडाउन से उछले गैस के दाम
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। कतर, दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक, ईरानी ड्रोन हमलों के बाद रस लफ्फान और मेसाइद इंडस्ट्रियल सिटी में अपनी प्रमुख सुविधाओं पर उत्पादन पूरी तरह रोक दिया। यह प्लांट वैश्विक LNG सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा प्रदान करता है।
इस शटडाउन के तुरंत बाद एशियाई स्पॉट मार्केट में JKM बेंचमार्क LNG कीमतें लगभग 39-40% उछलकर 25.40 डॉलर प्रति मिलियन BTU के स्तर पर पहुंच गईं, जो 2023 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। यूरोप में TTF नेचुरल गैस फ्यूचर्स 45-54% तक बढ़कर 46 यूरो प्रति MWh से अधिक हो गए, जो तीन साल का उच्चतम स्तर है। ब्रिटिश और डच होलसेल गैस कीमतें भी 50% के करीब उछलीं।
भारत, जो अपनी कुल LNG जरूरतों का करीब 40% कतर से लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट के जरिए आयात करता है, इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। सालाना 27 मिलियन टन LNG आयात में कतर की हिस्सेदारी प्रमुख है। Strait of Hormuz के माध्यम से जहाजों की आवाजाही रुकने से Petronet LNG जैसी कंपनियां कार्गो भेजने में असमर्थ हैं।
इस वजह से घरेलू बाजार में सप्लाई कटौती शुरू हो गई है। इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को 40% तक गैस कटौती का सामना करना पड़ रहा है। CNG स्टेशनों और पाइप्ड कुकिंग गैस के लिए भी चुनौतियां बढ़ी हैं। कई CGD कंपनियों ने GAIL को पत्र लिखकर घरेलू गैस और LNG उपलब्धता पर चिंता जताई है।
शेयर बाजार में होली के दिन (मंगलवार) LNG और सिटी गैस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। Petronet LNG और Mahanagar Gas के शेयर 9% तक लुढ़के, जबकि GAIL India और Indraprastha Gas में 4-9% की गिरावट आई। Adani Total Gas के शेयर भी 3-4% तक नीचे आए, जो हाल के महीनों में 483-798 रुपये के बीच ट्रेड कर रहे थे।
यह गिरावट मुख्य रूप से स्पॉट मार्केट में LNG कीमतों के दोगुने होने से आई है। टर्म कॉन्ट्रैक्ट रेट्स के मुकाबले स्पॉट कीमतें अब दोगुनी से अधिक हैं, जिससे इंपोर्टर्स की लागत बढ़ गई है। भारत में सिटी गैस कंपनियां पहले से ही महंगे गैस प्रोक्योरमेंट से जूझ रही थीं, अब यह संकट उनके मार्जिन को और दबाएगा।
वैश्विक स्तर पर यह संकट ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है। एशिया, जहां कतर से 80% से अधिक LNG निर्यात जाता है, अब स्पॉट मार्केट में वैकल्पिक सप्लाई के लिए यूरोप के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है। भारत ने गैस राशनिंग शुरू कर दी है और इमरजेंसी प्लान सक्रिय किए हैं।
यदि शटडाउन लंबा खिंचा तो कीमतें और उछल सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि वैकल्पिक सप्लाई जैसे अमेरिकी LNG या अन्य स्रोतों से भरपाई में समय लगेगा। भारत के लिए यह स्थिति घरेलू उत्पादन बढ़ाने और डाइवर्सिफिकेशन की जरूरत को और रेखांकित करती है।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और बाजार रुझानों पर आधारित है। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।