“वर्तमान में मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद सोने-चांदी की कीमतों में अपेक्षित उछाल नहीं दिख रहा है। वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती, मुनाफावसूली और घरेलू कारकों ने सुरक्षित निवेश की मांग को सीमित कर दिया है, जबकि हालिया दिनों में कीमतें पहले तेज बढ़ने के बाद सुधार रही हैं।”
युद्ध का सोना-चांदी पर नहीं दिख रहा कोई असर, ऐसा क्यों; एक्सपर्ट से समझें
आज के बाजार में सोने और चांदी की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर नजर आ रही हैं, जबकि मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच चल रहा संघर्ष वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता पैदा कर रहा है। सामान्यतः ऐसे समय में सोना सुरक्षित निवेश के रूप में तेजी से चढ़ता है, लेकिन इस बार स्थिति अलग दिख रही है।
वर्तमान में भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम ₹16,154 के आसपास है, जबकि 22 कैरेट सोना ₹14,797 प्रति ग्राम पर ट्रेड कर रहा है। 10 ग्राम के हिसाब से 24 कैरेट सोना लगभग ₹1,61,540 और 22 कैरेट ₹1,47,970 के स्तर पर है। चांदी की कीमत प्रति किलोग्राम ₹2,85,000 के करीब बनी हुई है, जो हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव के बाद स्थिरता दिखा रही है।
MCX पर अप्रैल 2026 सोना वायदा ₹1,60,000-1,61,000 के दायरे में कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी मई वायदा ₹2,67,000-2,72,000 के बीच है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर सोना $5,300 प्रति औंस के आसपास है, लेकिन हालिया दिनों में मुनाफावसूली के कारण इसमें गिरावट आई है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, युद्ध के बावजूद कीमतों पर सीमित असर की मुख्य वजहें निम्न हैं:
डॉलर की मजबूती : अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में हालिया बढ़त ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। मजबूत डॉलर होने पर सोना-चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग कम होती है।
मुनाफावसूली का दौर : पिछले कुछ हफ्तों में युद्ध शुरू होने पर सोना-चांदी में तेज उछाल आया था, जहां MCX सोना ₹1,67,000 तक पहुंच गया था। लेकिन अब निवेशक मुनाफा निकाल रहे हैं, जिससे कीमतें सुधार रही हैं।
औद्योगिक मांग में संतुलन : चांदी पर असर ज्यादा दिख रहा है क्योंकि यह औद्योगिक धातु भी है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता से मैन्युफैक्चरिंग डिमांड प्रभावित हो सकती है, जिससे चांदी की कीमतें सोने से अलग व्यवहार कर रही हैं।
फेड की नीति और ब्याज दरें : अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हुई हैं, क्योंकि युद्ध से मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा है। ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्ति के लिए नकारात्मक होती हैं।
घरेलू कारक : भारत में आयात शुल्क, जीएसटी और रुपये की स्थिति भी कीमतों को प्रभावित करती है। रुपये की हालिया मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय तेजी का पूरा फायदा नहीं दिया।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर युद्ध लंबा खिंचा और तेल की कीमतें ₹100 प्रति बैरल के पार गईं, तो सोने में नया उछाल आ सकता है। लेकिन फिलहाल बाजार रेंज-बाउंड है, जहां छोटे सुधार जारी हैं। निवेशकों को सलाह है कि कीमतों में गिरावट पर खरीदारी के अवसर तलाशें, लेकिन जोखिम प्रबंधन जरूरी है।
कीमतों का शहरवार अवलोकन (24 कैरेट प्रति ग्राम)
दिल्ली: ₹16,302
मुंबई: ₹16,287
चेन्नई: ₹16,300 (लगभग)
कोलकाता: ₹16,290 (लगभग)
चांदी (प्रति किलोग्राम) : ₹2,84,900 – ₹2,85,000
यह स्थिति दर्शाती है कि भू-राजनीतिक जोखिम बने रहने पर भी बाजार अन्य कारकों से ज्यादा प्रभावित हो रहा है। निवेश से पहले स्थानीय भाव और वैश्विक संकेतों की जांच जरूरी है।
Disclaimer: यह लेख बाजार की वर्तमान स्थिति पर आधारित है और निवेश सलाह नहीं है। कीमतें बदल सकती हैं।