“73 वर्षीय ओमप्रकाश गर्ग ने रिटायरमेंट की उम्र में कनाडा से भारत लौटकर क्यूपिड लिमिटेड की कमान संभाली, जो 7 करोड़ के कर्ज में डूबी हुई थी। उन्होंने कंपनी को महिला कंडोम के उत्पादन पर फोकस कर भारत की पहली ऐसी कंपनी बनाया और इसे 11 हजार करोड़ से अधिक की वैल्यूएशन वाली सफल इकाई में बदल दिया। यह मास्टरस्ट्रोक महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा और अनदेखे बाजार को लक्षित करने का था।”
रिटायरमेंट की उम्र में विदेश से लौटे, फिर 73 साल के इस बुजुर्ग ने मास्टरस्ट्रोक से बना दी ये 11 हजार करोड़ की कंपनी
ओमप्रकाश गर्ग, जिन्हें ओपी गर्ग के नाम से भी जाना जाता है, ने अपना अधिकांश जीवन कनाडा में बिताया। वहां उन्होंने बिजनेस और फैमिली लाइफ को संभाला, लेकिन रिटायरमेंट के करीब पहुंचते ही उन्होंने भारत वापसी का फैसला किया। 73 साल की उम्र में उन्होंने क्यूपिड लिमिटेड की जिम्मेदारी ली, जो उस समय गंभीर वित्तीय संकट में थी। कंपनी पर 7 करोड़ रुपये का कर्ज था और परंपरागत कंडोम बाजार में तीव्र प्रतिस्पर्धा के कारण यह डूबने की कगार पर खड़ी थी।
गर्ग ने कंपनी की रणनीति पूरी तरह बदल दी। उन्होंने अनदेखे सेगमेंट पर फोकस किया—महिला कंडोम (female condom)। भारत में महिला कंडोम का उत्पादन और मार्केटिंग लगभग न के बराबर था। गर्ग ने इसे कंपनी का मुख्य प्रोडक्ट बनाया और क्यूपिड लिमिटेड को देश की पहली कंपनी बनाया जिसने बड़े पैमाने पर महिला कंडोम का निर्माण शुरू किया। यह फैसला स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना क्योंकि महिला कंडोम महिलाओं को यौन संचारित रोगों और अनचाहे गर्भ से सुरक्षा प्रदान करने में पुरुष कंडोम से अधिक प्रभावी साबित होता है, साथ ही यह महिलाओं को नियंत्रण का अधिकार देता है।
इस बदलाव के परिणामस्वरूप कंपनी की ग्रोथ तेज हुई। महिला कंडोम की मांग धीरे-धीरे बढ़ी, खासकर शहरी क्षेत्रों, एनजीओ और सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में। कंपनी ने निर्यात पर भी जोर दिया, जिससे विदेशी बाजारों में पहुंच बनी। आज क्यूपिड लिमिटेड की वैल्यूएशन 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुकी है। कंपनी अब भारत में महिला स्वास्थ्य उत्पादों के प्रमुख ब्रांडों में शुमार है और इसके प्रोडक्ट्स कई देशों में उपलब्ध हैं।
मास्टरस्ट्रोक की मुख्य वजहें
बाजार का अनदेखा सेगमेंट : पुरुष कंडोम पर निर्भर रहने वाली कंपनी को महिला कंडोम पर शिफ्ट कर विविधता लाई गई।
महिला सशक्तिकरण फोकस : प्रोडक्ट को महिला स्वास्थ्य और सुरक्षा से जोड़कर सोशल इम्पैक्ट बनाया, जिससे ब्रांड वैल्यू बढ़ी।
कर्ज मुक्ति और विस्तार : 7 करोड़ के कर्ज से उबरकर कंपनी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई और नए प्लांट लगाए।
निर्यात रणनीति : अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एंट्री से रेवेन्यू स्ट्रीम्स मजबूत हुए।
कंपनी की वर्तमान स्थिति
क्यूपिड लिमिटेड अब एक स्थापित नाम है। कंपनी के प्रोडक्ट्स सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल हैं और प्राइवेट सेक्टर में भी लोकप्रिय हो रहे हैं। महिला कंडोम के अलावा कंपनी अन्य फेमिनिन हाइजीन और स्वास्थ्य उत्पादों में भी विस्तार कर रही है। गर्ग की लीडरशिप में कंपनी ने न केवल वित्तीय स्थिरता हासिल की बल्कि सामाजिक बदलाव में योगदान दिया।
यह कहानी साबित करती है कि उम्र कोई बाधा नहीं होती। 73 साल की उम्र में भी दृढ़ इच्छाशक्ति और सही रणनीति से बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है। गर्ग का सफर उन उद्यमियों के लिए प्रेरणा है जो रिटायरमेंट के बाद भी कुछ नया करने का साहस रखते हैं।
Disclaimer: यह एक प्रेरक बिजनेस सफलता की रिपोर्ट है। इसमें वर्णित घटनाएं और आंकड़े उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। निवेश संबंधी कोई सलाह नहीं है।