“ईरान में सरकारी सब्सिडी के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें बेहद कम हैं, जहां डीजल 30 पैसे और पेट्रोल 2 रुपये प्रति लीटर मिलता है, जबकि भारत में ये कीमतें 90 रुपये से ऊपर हैं। यह अंतर तेल भंडार, सब्सिडी नीतियों और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़ा है, जो वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित करता है।”
ईरान में ईंधन की कीमतें विश्व स्तर पर सबसे कम हैं, जहां सरकारी सब्सिडी सिस्टम के तहत आम नागरिकों को राशन कोटा पर पेट्रोल 2 रुपये प्रति लीटर और डीजल 30 पैसे प्रति लीटर उपलब्ध होता है। यह कीमतें मिनरल वॉटर की एक बोतल से भी सस्ती पड़ती हैं, जहां 1 लीटर पानी 20 रुपये में बिकता है। ईरान के पास विशाल तेल भंडार हैं, जो लगभग 50 दिनों के उत्पादन के बराबर स्टॉक रखते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण निर्यात सीमित है।
यह सस्ता ईंधन ईरान की अर्थव्यवस्था का आधार है, जहां सब्सिडी से परिवहन और कृषि क्षेत्र को लाभ मिलता है। हालांकि, कोटा खत्म होने पर कीमतें थोड़ी बढ़कर 2.5 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती हैं। वैश्विक स्तर पर, ऐसे कम दाम तस्करी को बढ़ावा देते हैं, जिससे पड़ोसी देशों में ईंधन अवैध रूप से पहुंचता है।
भारत में स्थिति बिल्कुल उलट है, जहां पेट्रोल 94 रुपये और डीजल 88 रुपये प्रति लीटर बिकता है। यह अंतर टैक्स स्ट्रक्चर, आयात निर्भरता और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों से आता है। ईरान के मॉडल से भारत सब्सिडी रिफॉर्म पर विचार कर सकता है, लेकिन आर्थिक दबावों के कारण ऐसा लागू करना चुनौतीपूर्ण है।
ईंधन कीमतों की तुलना (प्रति लीटर, भारतीय रुपये में)
प्रमुख बिंदु
| देश | पेट्रोल कीमत | डीजल कीमत | कारण |
|---|---|---|---|
| ईरान | 2 रुपये | 30 पैसे | सरकारी सब्सिडी और तेल भंडार |
| भारत | 94 रुपये | 88 रुपये | उच्च टैक्स और आयात |
| पाकिस्तान | 263 रुपये | 250 रुपये | बाजार आधारित मूल्य निर्धारण |
| सऊदी अरब | 45 रुपये | 40 रुपये | तेल निर्यातक होने के बावजूद मध्यम सब्सिडी |
सब्सिडी सिस्टम : ईरान में 60 लीटर पेट्रोल का मासिक कोटा सब्सिडाइज्ड रेट पर मिलता है, जो आम परिवारों के लिए पर्याप्त है।
आर्थिक प्रभाव : कम कीमतें उपभोक्ताओं को राहत देती हैं, लेकिन सरकारी खजाने पर बोझ डालती हैं, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ सकती है।
वैश्विक संदर्भ : अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान तेल स्टॉक बनाए रखता है, जो चीन जैसे बाजारों पर असर डालता है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य : यदि वैश्विक तेल कीमतें गिरें, तो भारत में भी 2-5 रुपये की कमी संभव है, लेकिन ईरान जैसा स्तर असंभव।
ईरान की नीति से सीखते हुए, भारत रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस कर सकता है, जहां इलेक्ट्रिक वाहनों से ईंधन निर्भरता कम होगी। हालांकि, सस्ते ईंधन का मॉडल पर्यावरणीय चुनौतियां भी पैदा करता है, जैसे अधिक उत्सर्जन।
Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार स्रोतों और बाजार विश्लेषण पर आधारित है। कीमतें बाजार उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो सकती हैं। पाठक अपनी जांच करें।