“बजट 2026 से पहले पेंशन पर टैक्स खत्म करने, बीमा डिडक्शन बढ़ाने और लोन पर राहत की मांगें तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नई टैक्स रिजीम को आकर्षक बनाने के लिए स्वास्थ्य बीमा और होम लोन इंटरेस्ट पर डिडक्शन दिए जा सकते हैं, जबकि NPS में लंपसम विदड्रॉल पर फुल एग्जेम्प्शन की उम्मीद है। सरकार इन मांगों पर विचार कर मिडिल क्लास को राहत दे सकती है।”
बजट 2026 में टैक्सपेयर्स की उम्मीदें बढ़ गई हैं, खासकर रिटायरमेंट सिक्योरिटी और फाइनेंशियल रिलीफ पर। पेंशन पर टैक्स खत्म करने की मांग सबसे ऊपर है, क्योंकि रिटायर्ड लोग बैंक इंटरेस्ट पर TDS से परेशान हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सेक्शन 194A के तहत TDS थ्रेशोल्ड को बढ़ाकर 50,000 रुपये से ज्यादा किया जा सकता है, जिससे सीनियर सिटीजन्स को सालाना 10-15% ज्यादा इनकम रिटेन करने में मदद मिलेगी।
बीमा सेक्टर में टैक्स पैरिटी की डिमांड जोर पकड़ रही है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां एन्युटी और पेंशन प्रोडक्ट्स पर टैक्स ट्रीटमेंट को एक समान बनाने की बात कर रही हैं, ताकि रिटायरमेंट प्लानिंग आसान हो। हालिया सर्वे में 70% से ज्यादा मिडिल इनकम ग्रुप ने हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन लिमिट बढ़ाने की मांग की है, जो फिलहाल 25,000 रुपये है और इसे 50,000 रुपये तक ले जाने की उम्मीद है।
लोन पर राहत की बात करें तो होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन को नई टैक्स रिजीम में शामिल करने की मांग है। वर्तमान में ओल्ड रिजीम में सेक्शन 24 के तहत 2 लाख रुपये तक डिडक्शन मिलता है, लेकिन नई रिजीम चुनने वाले इससे वंचित रह जाते हैं। अगर बजट में यह बदलाव आया तो मिडिल क्लास होम बायर्स को सालाना 20,000-30,000 रुपये की बचत हो सकती है, खासकर बढ़ती इंटरेस्ट रेट्स के बीच।
NPS में बदलाव की भी चर्चा है। सेक्शन 10(12A) के तहत 80% लंपसम विदड्रॉल पर फुल टैक्स एग्जेम्प्शन देने की मांग उठी है, जो फिलहाल पार्शियल है। इससे रिटायरमेंट फंड्स में 15-20% ज्यादा ग्रोथ देखी जा सकती है, क्योंकि लाइफ एक्सपेक्टेंसी बढ़ने से लॉन्ग-टर्म सेविंग्स जरूरी हो गई हैं।
सीनियर केयर और हेल्थकेयर पर GST रिलीफ की उम्मीद है। सीनियर केयर सर्विसेज को GST से एग्जेम्प्ट या हेल्थकेयर रेट पर टैक्स करने से मेडिकल कॉस्ट 5-10% कम हो सकती है, जो मेडिकल इन्फ्लेशन के 12% सालाना रेट को बैलेंस करेगी।
बजट से पहले उठी ये 5 बड़ी मांगें
| मांग | विवरण | संभावित प्रभाव |
|---|---|---|
| पेंशन पर टैक्स खत्म | NPS लंपसम पर 100% एग्जेम्प्शन और TDS थ्रेशोल्ड बढ़ाना | रिटायर्ड लोगों को सालाना 10,000-50,000 रुपये की बचत, रिटायरमेंट प्लानिंग बूस्ट |
| हेल्थ इंश्योरेंस डिडक्शन बढ़ाना | सेक्शन 80D लिमिट 25,000 से 50,000 रुपये करना, सीनियर्स के लिए 75,000 तक | मेडिकल इन्फ्लेशन से राहत, 60% ज्यादा लोग बीमा लेंगे |
| होम लोन इंटरेस्ट राहत | नई टैक्स रिजीम में सेक्शन 24 डिडक्शन शामिल करना | होम बायर्स को 20,000-40,000 रुपये सालाना बचत, रियल एस्टेट सेक्टर ग्रोथ |
| एन्युटी और पेंशन प्रोडक्ट्स पर टैक्स पैरिटी | लाइफ इंश्योरेंस और रिटायरमेंट प्रोडक्ट्स पर एकसमान टैक्स | इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा, घरेलू सेविंग्स रेट 2-3% ऊपर |
| जॉइंट टैक्सेशन फॉर मैरिड कपल्स | वैकल्पिक जॉइंट फाइलिंग सिस्टम शुरू करना | सिंगल इनकम फैमिली को 15-25% टैक्स सेविंग, ICAI की सिफारिश |
इन मांगों पर सरकार का फोकस मिडिल क्लास को राहत देने पर है, क्योंकि GDP ग्रोथ 7.4% होने की उम्मीद के बीच इनकम टैक्स स्लैब्स को वाइडर बनाने की भी बात हो रही है। अगर ये बदलाव आए तो स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 से 90,000 रुपये तक बढ़ाया जा सकता है, जो सैलरीड क्लास को डायरेक्ट बेनिफिट देगा।
बीमा इंडस्ट्री के लीडर्स प्रिवेंटिव केयर पर टैक्स इंसेंटिव्स की मांग कर रहे हैं, ताकि टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ चेकअप्स पर डिडक्शन मिले। इससे प्रोटेक्शन लेवल्स बढ़ेंगे, क्योंकि फिलहाल सिर्फ 30% आबादी इंश्योर्ड है।
लोन सेक्टर में एजुकेशन लोन पर भी राहत की उम्मीद है, जहां इंटरेस्ट डिडक्शन को अनलिमिटेड रखा जा सकता है, लेकिन नई रिजीम में इसे शामिल करने से स्टूडेंट्स को फायदा होगा।
Disclaimer: This news report is based on tips and sources.