“संघ बजट 2026 में न्यू टैक्स रिजीम को और आकर्षक बनाने की उम्मीदें तेज हैं, जहां बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट बढ़ सकती है, टैक्स स्लैब्स में राहत मिल सकती है, स्टैंडर्ड डिडक्शन ऊपर जा सकता है, सीनियर सिटीजन को अतिरिक्त लाभ मिलेंगे और हेल्थ इंश्योरेंस पर ज्यादा डिडक्शन का प्रावधान हो सकता है, जिससे मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को सीधी बचत होगी।”
न्यू टैक्स रिजीम के ये 5 संभावित बदलाव
न्यू टैक्स रिजीम, जो 2020 में शुरू हुआ था, अब डिफॉल्ट ऑप्शन है और इसमें लगातार सुधार हो रहे हैं। बजट 2026 में विशेषज्ञों की सिफारिशों पर आधारित ये बदलाव टैक्सपेयर्स के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। यहां ICAI, FICCI और Assocham जैसी संस्थाओं के सुझावों से प्रेरित 5 प्रमुख अपडेट्स:
बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट में बढ़ोतरी : वर्तमान में 3 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री है, लेकिन बजट में इसे 5 लाख रुपये तक बढ़ाने की मांग है। इससे लोअर मिडिल क्लास को सालाना 10,000 से 15,000 रुपये की अतिरिक्त बचत हो सकती है, खासकर महंगाई को देखते हुए।
टैक्स स्लैब्स का विस्तार : 5% और 10% टैक्स ब्रैकेट को बढ़ाकर 3-7 लाख से 3-10 लाख रुपये तक किया जा सकता है। इससे मिडिल इनकम ग्रुप (7-15 लाख रुपये) पर टैक्स बोझ 20% से घटकर औसतन 15% रह जाएगा, जो पिछले सालों की तुलना में 2-3% की राहत देगा।
नीचे संभावित न्यू टैक्स स्लैब्स की तुलना:
| इनकम रेंज (रुपये) | मौजूदा टैक्स रेट (%) | संभावित नया टैक्स रेट (%) |
|---|---|---|
| 0-3 लाख | 0 | 0 |
| 3-7 लाख | 5 | 5 |
| 7-10 लाख | 10 | 5 (विस्तारित) |
| 10-12 लाख | 15 | 10 |
| 12-15 लाख | 20 | 15 |
| 15 लाख से ऊपर | 30 | 30 |
स्टैंडर्ड डिडक्शन का अपग्रेड : मौजूदा 50,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 रुपये तक बढ़ाने की उम्मीद है। इससे सैलरीड क्लास को बिना किसी क्लेम के सीधी राहत मिलेगी, जो मेट्रो सिटी में रहने वालों के लिए ट्रांसपोर्ट और मेडिकल खर्चों को कवर करेगी।
सीनियर सिटीजन के लिए स्पेशल डिडक्शन : इंटरेस्ट इनकम पर डिडक्शन लिमिट 50,000 से 1 लाख रुपये हो सकती है, साथ ही हेल्थकेयर खर्चों पर 1 लाख तक का अतिरिक्त लाभ। इससे रिटायर्ड पर्सन्स की टैक्स लायबिलिटी 20-30% घट सकती है, खासकर पेंशनर्स के लिए।
हेल्थ इंश्योरेंस पर बढ़ा डिडक्शन : सेक्शन 80D के तहत प्रीमियम पर 25,000 रुपये की लिमिट को 50,000 रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। इससे फैमिली हेल्थ कवरेज को बढ़ावा मिलेगा, जो पोस्ट-पैंडेमिक हेल्थकेयर ट्रेंड्स को देखते हुए टैक्सपेयर्स को सालाना 5,000-10,000 रुपये की बचत देगा।
ये बदलाव न्यू रिजीम को ओल्ड रिजीम से ज्यादा आकर्षक बनाएंगे, जहां डिडक्शन की कमी को बैलेंस करने के लिए लोअर रेट्स पर फोकस है। टैक्सपेयर्स को अपना रिटर्न फाइल करते समय इन अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए।
डिस्क्लेमर : यह लेख समाचार रिपोर्टों, विशेषज्ञ सुझावों और कर सलाह पर आधारित है। कर संबंधी निर्णय लेने से पहले पेशेवर सलाहकार से परामर्श करें।