इंडिगो (इंटरग्लोब एविएशन) के शेयर 27 फरवरी 2026 को 2.15% गिरकर 4827.20 रुपये पर बंद हुए। हाल के महीनों में कंपनी के कमजोर तिमाही नतीजों, ऑपरेशनल चुनौतियों और बढ़ती लागतों से दबाव बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर 4700-4800 का सपोर्ट टूटा तो भाव 4500 या उससे नीचे जा सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में 5760-6000 तक रिकवरी की उम्मीद है।
इंडिगो के शेयरों में और बढ़ सकती है गिरावट, 4827 रुपये के बाद अब कहां तक जा सकता है भाव
इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो) के शेयरों में लगातार दबाव देखा जा रहा है। 27 फरवरी 2026 को NSE पर शेयर 4,827.20 रुपये पर बंद हुआ, जो पिछले बंद 4,933.50 रुपये से 106.30 रुपये या 2.15% कम है। दिन के दौरान भाव 4,792 रुपये के निचले स्तर तक पहुंचा जबकि उच्चतम 4,920 रुपये रहा। वॉल्यूम 11.99 लाख शेयरों का रहा।
यह गिरावट हाल के महीनों में जारी ट्रेंड का हिस्सा है। पिछले 52 हफ्तों में शेयर का उच्चतम स्तर 6,232.50 रुपये और निचला स्तर 4,267.55 रुपये रहा है। पिछले 6 महीनों में करीब 20% की गिरावट आई है जबकि पिछले साल से अब तक रिटर्न सिर्फ 8-11% के आसपास है। मार्केट कैप 1,86,625 करोड़ रुपये के करीब है।
गिरावट के प्रमुख कारण
कंपनी के Q3 FY26 नतीजों ने निवेशकों का भरोसा डिगाया। दिसंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट 77.6% गिरकर 549 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में 2,448 करोड़ था। रेवेन्यू 6.7% बढ़कर 24,541 करोड़ रहा लेकिन खर्च 9.6% उछलकर 22,432 करोड़ हो गए।
कई फैक्टरों ने असर डाला:
नए लेबर कोड्स से एकबारगी 969 करोड़ का खर्च।
दिसंबर में ऑपरेशनल डिसरप्शन से 577 करोड़ का अतिरिक्त बोझ।
रुपए की कमजोरी से फ्यूल और अन्य लागतें बढ़ीं।
DGCA के नए नियमों से टिकट कैंसिलेशन पॉलिसी में बदलाव, जिससे रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है।
पायलट हायरिंग और ट्रेनिंग लागत में वृद्धि, क्योंकि 2026 तक 742 पायलट्स जोड़ने की योजना है।
इन वजहों से शेयर पिछले कुछ महीनों से 5,000-6,000 के रेंज से नीचे आ गया है। हाल में DGCA के फैसले ने भी अतिरिक्त दबाव बनाया।
टेक्निकल एनालिसिस और सपोर्ट-रेजिस्टेंस लेवल
टेक्निकल चार्ट पर शेयर प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है। शॉर्ट टर्म में नेगेटिव सिग्नल हैं, MACD सेल सिग्नल दे रहा है। वॉल्यूम पर गिरावट के साथ प्राइस डाउन होने से कमजोरी दिख रही है।
मुख्य लेवल:
तत्काल सपोर्ट: 4,792-4,700 रुपये (यह स्तर कई बार टेस्ट हुआ और होल्ड हुआ है)।
अगर 4,700 टूटा तो अगला सपोर्ट 4,500-4,400 रुपये तक जा सकता है।
रेजिस्टेंस: 4,933 (पिछला क्लोज), 5,000 (मजबूत बाधा जहां कॉल राइटर्स एक्टिव)।
अगर 5,000 के ऊपर क्लोज हुआ तो 5,300 तक रिकवरी संभव, जो हाल की गिरावट का 50% फिबोनाची रिट्रेसमेंट है।
एक्सपर्ट्स की राय और प्राइस टारगेट
वॉल स्ट्रीट और घरेलू ब्रोकरेज की राय मिक्स्ड लेकिन लॉन्ग टर्म में ज्यादातर बुलिश हैं। औसत 12-महीने का प्राइस टारगेट 5,760-6,065 रुपये है, जो करंट लेवल से 19-22% अपसाइड दिखाता है।
गोल्डमैन सैक्स: बाय, टारगेट 6,000 रुपये (22% अपसाइड)।
अन्य एनालिस्ट्स: हाई टारगेट 6,300-6,930 रुपये, लो 5,830 रुपये।
कुछ टेक्निकल एनालिस्ट्स: शॉर्ट टर्म में -8% तक गिरावट संभव, 3 महीने में 4,079-4,974 रेंज।
ज्यादातर ब्रोकरेज बाय रेटिंग बरकरार रखे हुए हैं, क्योंकि इंडिया की एविएशन ग्रोथ, 62% मार्केट शेयर और फ्लीट एक्सपैंशन से लॉन्ग टर्म पोटेंशियल मजबूत है।
निवेशकों के लिए सलाह
शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को 4,700 के नीचे स्टॉप लॉस के साथ सतर्क रहना चाहिए। लॉन्ग टर्म निवेशक डिप्स पर खरीदारी पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि एविएशन सेक्टर में भारत की ग्रोथ स्टोरी मजबूत है। हालांकि, Q4 नतीजों और फ्यूल प्राइस ट्रेंड पर नजर रखें।
Disclaimer: यह न्यूज और मार्केट एनालिसिस आधारित जानकारी है। स्टॉक मार्केट में निवेश जोखिमपूर्ण है। कोई भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित एडवाइजर से सलाह लें।