कौन बना रहा भारत का सबसे लंबा फ्लाईओवर? ₹2200 Cr में तैयार होगा अनोखा रास्ता; इस शहर की बढ़ेगी रौनक.

“केरल के NH 66 पर NHAI द्वारा 2200 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा 12.75 किमी लंबा अरूर-थुरावूर एलिवेटेड हाईवे भारत का सबसे लंबा फ्लाईओवर बनेगा, जो छह लेन वाला सिंगल-पिलर स्काईवे है और मई 2026 तक पूरा होने वाला है। इससे तमिलनाडु-कर्नाटक कनेक्टिविटी मजबूत होगी, ट्रांसपोर्टेशन लागत घटेगी और कोच्चि शहर की आर्थिक रौनक बढ़ेगी।”

केरल के अलप्पुझा जिले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा विकसित किया जा रहा अरूर-थुरावूर एलिवेटेड हाईवे प्रोजेक्ट देश की सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने वाला है। यह हाईवे NH 66 का हिस्सा है, जो अरूर से थुरावूर तक फैला हुआ है और अपनी अनोखी डिजाइन के कारण ‘स्काईवे’ के रूप में जाना जा रहा है। सिंगल-पिलर स्ट्रक्चर पर आधारित यह फ्लाईओवर जमीन से ऊपर उठा हुआ है, जिससे नीचे की सड़क पर ट्रैफिक बिना रुकावट चल सकेगा। प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 12.75 किलोमीटर है, जो वर्तमान में देश के किसी भी अन्य फ्लाईओवर से ज्यादा है।

इस हाईवे का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जहां 360 सपोर्टिंग पिलर्स और 3000 गर्डर्स पहले ही पूरे हो चुके हैं। वर्तमान में गर्डर्स की प्लेसमेंट, तीन एग्जिट रैंप्स और एक टोल प्लाजा पर फोकस है। लगभग 2500 मजदूर और 350 मशीनें दिन-रात काम कर रही हैं, जिससे प्रोजेक्ट की प्रगति 85 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है। NHAI के अधिकारियों के अनुसार, मौसम की चुनौतियों जैसे मॉनसून के दौरान पानी जमा होने की समस्या को सॉल्व करने के लिए स्पेशल ड्रेनेज सिस्टम लगाया गया है, जो भविष्य में रखरखाव को आसान बनाएगा।

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प्रोजेक्ट की तकनीकी विशेषताएं

यह एलिवेटेड हाईवे छह लेन वाला है, जिसमें प्रत्येक दिशा में तीन लेन होंगी। सिंगल-पिलर डिजाइन से भूमि अधिग्रहण कम हुआ है, जो पर्यावरण के अनुकूल है। हाईवे की ऊंचाई औसतन 10-12 मीटर है, जो नीचे की लोकल सड़कों को प्रभावित किए बिना हाई-स्पीड ट्रैफिक की अनुमति देता है। सुरक्षा के लिए LED लाइटिंग, CCTV कैमरे और इमरजेंसी लेन शामिल हैं।

निर्माण की प्रगति और चुनौतियां

विशेषताविवरण
कुल लंबाई12.75 किलोमीटर
लेन की संख्या6 (प्रत्येक दिशा में 3)
डिजाइन प्रकारसिंगल-पिलर एलिवेटेड स्काईवे
सपोर्टिंग पिलर्स360 (पूर्ण)
गर्डर्स3000 (पूर्ण)
एग्जिट रैंप्स3
टोल प्लाजा1
लागत₹2200 करोड़

फरवरी 2026 तक, प्रोजेक्ट में मुख्य स्ट्रक्चरल वर्क पूरा हो चुका है। गर्डर्स की प्लेसमेंट अब अंतिम चरण में है, जहां प्रत्येक गर्डर को क्रेन से उठाकर फिट किया जा रहा है। तीन एग्जिट रैंप्स में से दो पर कॉन्क्रीटिंग शुरू हो गई है, जबकि टोल प्लाजा पर FASTag इंटीग्रेशन का काम चल रहा है। चुनौतियों में लोकल ट्रैफिक मैनेजमेंट शामिल है, क्योंकि निर्माण के दौरान NH 66 पर डायवर्जन लगाए गए हैं, जिससे दैनिक यात्रियों को 15-20 मिनट अतिरिक्त समय लग रहा है। हालांकि, NHAI ने वैकल्पिक रूट्स जैसे लोकल बाईपास को मजबूत किया है। पर्यावरणीय क्लियरेंस के तहत, हाईवे के किनारे 5000 से ज्यादा पेड़ लगाए जा रहे हैं, जो कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगा।

लाभ और आर्थिक प्रभाव

यह फ्लाईओवर पूरा होने पर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कनेक्टिविटी को नया आयाम देगा। वर्तमान में अरूर-थुरावूर स्ट्रेच पर ट्रैफिक जाम से रोजाना 30-45 मिनट का नुकसान होता है, जो अब घटकर 10 मिनट रह जाएगा। ट्रांसपोर्टेशन लागत में 20 प्रतिशत की कमी आएगी, क्योंकि ईंधन की बचत होगी। कोच्चि शहर की रौनक बढ़ेगी, क्योंकि यह पोर्ट सिटी से सीधा कनेक्ट होगा, जिससे टूरिज्म और इंडस्ट्रीज को बूस्ट मिलेगा। अलप्पुझा जिले के लोकल बिजनेस, जैसे फिशिंग और टूरिज्म, को फायदा होगा, क्योंकि माल की ढुलाई तेज हो जाएगी।

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ट्रैफिक रिडक्शन : दैनिक 50,000 वाहनों का फ्लो सुचारू होगा।

सुरक्षा बढ़ोतरी : एलिवेटेड डिजाइन से एक्सिडेंट रेट 30 प्रतिशत कम होगा।

रोजगार सृजन : निर्माण चरण में 2500 नौकरियां, ऑपरेशनल फेज में 500 अतिरिक्त।

पर्यावरण लाभ : कम ईंधन खपत से सालाना 10,000 टन CO2 उत्सर्जन में कमी।

क्षेत्रीय विकास : कोच्चि से थुरावूर तक का सफर 20 मिनट कम, जो लॉजिस्टिक्स हब बनाएगा।

टोल सिस्टम और उपयोगिता

उपयोगकर्ताओं को इस छह-लेन एलिवेटेड स्ट्रेच के लिए अलग टोल देना होगा, जो FASTag से जुड़ा होगा। अनुमानित टोल रेट कारों के लिए ₹100-150 और ट्रकों के लिए ₹300-400 है, जो प्रोजेक्ट की मेंटेनेंस लागत कवर करेगा। NHAI का दावा है कि यह टोल समय की बचत से वसूल हो जाएगा। हाईवे पर इमरजेंसी सर्विसेज जैसे एम्बुलेंस पॉइंट्स और रेस्ट एरिया भी होंगे, जो लॉन्ग-डिस्टेंस ट्रैवलर्स के लिए उपयोगी साबित होंगे।

यह प्रोजेक्ट भारत की सड़क नेटवर्क को विश्व स्तर का बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दक्षिण भारत के आर्थिक कॉरिडोर को मजबूत करेगा। कोच्चि जैसे शहरों में ट्रैफिक की समस्या हल होने से बिजनेस एक्टिविटी बढ़ेगी, और लोकल इकोनॉमी में सालाना 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त योगदान संभव है।

Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट सूत्रों पर आधारित है।

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