सरकारी तेल कंपनियां होर्मुज संकट के बीच घरेलू एलपीजी सप्लाई बचाने के लिए 14.2 किलो वाले स्टैंडर्ड सिलिंडर में सिर्फ 10 किलो गैस भरने की योजना पर विचार कर रही हैं। इससे सीमित स्टॉक ज्यादा घरों तक पहुंचेगा, लेकिन रिफिल ज्यादा बार करना पड़ेगा। दिल्ली में 14.2 किलो सिलिंडर की कीमत 913 रुपये है, तो 10 किलो का अनुमानित रेट लगभग 640-650 रुपये हो सकता है। हालांकि सरकार ने इसे ‘अटकलें’ बताते हुए खारिज किया है, लेकिन इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक यह प्लान-बी तैयार है।
रसोई गैस सिलिंडर में बड़ा बदलाव आने वाला है?
पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होने से भारत की एलपीजी आयात बुरी तरह प्रभावित हो गई है। घरेलू स्टॉक घटने और इंपोर्ट कम होने के चलते सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम एक अहम रणनीति पर विचार कर रही हैं।
इसके तहत घरेलू इस्तेमाल वाले स्टैंडर्ड 14.2 किलो वाले सिलिंडर में पूरी गैस की बजाय सिर्फ 10 किलो LPG भरकर सप्लाई की जा सकती है। इंडस्ट्री के अधिकारियों का अनुमान है कि औसत परिवार में 14.2 किलो सिलिंडर 35-40 दिनों तक चलता है, जबकि 10 किलो वाला सिलिंडर भी करीब एक महीने की जरूरत पूरी कर सकता है। इससे उपलब्ध गैस को ज्यादा से ज्यादा घरों में बांटा जा सकेगा और संकट के दौरान कोई बड़ा ब्रेकडाउन नहीं होगा।
यदि यह योजना लागू होती है तो सिलिंडर पर स्पष्ट स्टिकर लगाया जाएगा, जिसमें लिखा होगा कि इसमें 10 किलो ही गैस है। कीमत भी वजन के अनुपात में तय होगी। फिलहाल दिल्ली में 14.2 किलो घरेलू सिलिंडर की कीमत 913 रुपये है, मुंबई में 912.50 रुपये। प्रति किलो के हिसाब से देखें तो यह करीब 64-65 रुपये प्रति किलो आता है। ऐसे में 10 किलो वाले सिलिंडर की अनुमानित कीमत 640-650 रुपये के आसपास रह सकती है।
क्यों पड़ रहा है इतना दबाव?
भारत एलपीजी का बड़ा आयातक है और इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई चेन बाधित।
घरेलू उत्पादन सीमित है, इसलिए इंपोर्ट पर निर्भरता ज्यादा।
हाल ही में दिल्ली में 14.2 किलो सिलिंडर की कीमत 60 रुपये बढ़कर 913 रुपये हो गई है, जो मार्च 2026 की शुरुआत में लागू हुई।
पहले से ही कुछ शहरों में रिफिल के लिए 25 दिनों का न्यूनतम अंतर और ग्रामीण इलाकों में 45 दिनों तक का इंतजार अनिवार्य कर दिया गया है ताकि होर्डिंग रोकी जा सके।
उपभोक्ताओं पर क्या असर?
| पैरामीटर | 14.2 किलो सिलिंडर (वर्तमान) | 10 किलो सिलिंडर (संभावित) |
|---|---|---|
| औसत अवधि | 35-40 दिन | करीब 25-30 दिन |
| दिल्ली में कीमत | 913 रुपये | अनुमानित 640-650 रुपये |
| रिफिल फ्रीक्वेंसी | महीने में 1 बार | महीने में 1-1.5 बार |
| कुल सालाना खर्च (12 रिफिल) | लगभग 10,956 रुपये | ज्यादा हो सकता है (अधिक डिलीवरी) |
| सब्सिडी प्रभाव | PMUY पर 300 रुपये प्रति सिलिंडर (9 रिफिल तक) | अनुपात में कम |
यह बदलाव लागू होने पर घरों को ज्यादा बार बुकिंग करनी पड़ेगी, जिससे डिलीवरी पर दबाव बढ़ेगा। छोटे परिवारों के लिए यह सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन बड़े परिवारों को असुविधा होगी। साथ ही, बॉटलिंग प्लांट्स में वेटिंग सिस्टम कैलिब्रेट करने और रेगुलेटरी मंजूरी की जरूरत पड़ेगी।
सरकार का रुख
पेट्रोलियम मंत्रालय ने ऐसी खबरों को ‘अत्यधिक अटकलें’ बताते हुए खारिज किया है। संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि 14.2 किलो सिलिंडर में कटौती की कोई योजना नहीं है और लोगों को अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। हालांकि इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि यह प्लान-बी के रूप में तैयार है, अगर संकट और गहराया तो लागू किया जा सकता है।
विकल्प क्या हैं?
सरकार ने राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी कोटा 30% से बढ़ाकर 50% कर दिया है। प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो छोटे सिलिंडर रिफिल की सुविधा भी बढ़ाई गई है। साथ ही, वैकल्पिक आयात स्रोत तलाशे जा रहे हैं और बफर स्टॉक बनाने की कोशिश हो रही है।
यह स्थिति वैश्विक घटनाओं से जुड़ी है, इसलिए स्थायी समाधान के लिए मध्य पूर्व में शांति जरूरी है। फिलहाल उपभोक्ताओं को सिलेंडर की बुकिंग समय पर करानी चाहिए और अनावश्यक स्टॉकिंग से बचना चाहिए।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स पर आधारित है। कीमतें शहर और समय के अनुसार बदल सकती हैं। सरकारी घोषणा के बाद ही कोई बदलाव अंतिम माना जाएगा।