पिता के देहांत के बाद सिर्फ 50 रुपये लेकर ओमान पहुंचे, सुल्तान कबूस मस्जिद जैसी शानदार इमारतों में दिया योगदान, आज हैं 20 हजार करोड़ से ज्यादा के मालिक

“केरल के एक साधारण परिवार से निकले पीएनसी मेनन ने मात्र 10 साल की उम्र में पिता को खो दिया। परिवार की आर्थिक तंगी के बीच पढ़ाई छोड़नी पड़ी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 1970 के दशक में सिर्फ 50 रुपये जेब में लेकर ओमान पहुंचे, जहां इंटीरियर डेकोरेशन से शुरुआत कर सुल्तान कबूस ग्रैंड मस्जिद और अल बुस्तान पैलेस जैसी प्रतिष्ठित परियोजनाओं में काम किया। बाद में भारत लौटकर शोभा लिमिटेड की स्थापना की, जो आज भारत की प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों में शुमार है। उनकी कंपनी की मार्केट कैप करीब 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है और कुल कारोबारी साम्राज्य 20-25 हजार करोड़ रुपये के आसपास अनुमानित है।”

केरल के पुथन नडुवक्कट्ट गांव में जन्मे पीएनसी मेनन की जिंदगी तब उलट-पुलट गई जब वे महज 10 साल के थे। उनके पिता, जो एक किसान थे, का असमय निधन हो गया। परिवार गरीबी में डूब गया और मेनन को स्कूल छोड़कर काम पर लगना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पढ़ाई छूटने के बावजूद उन्होंने डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में रुचि दिखाई।

1970 के दशक में एक परिचित के जरिए ओमान में नौकरी का मौका मिला। उस समय विदेश जाने वालों को सिर्फ 50 रुपये ले जाने की इजाजत थी। मेनन ने यही रकम जेब में डाली और ओमान के लिए रवाना हो गए। वहां पहुंचकर उन्होंने इंटीरियर डेकोरेशन का छोटा-सा काम शुरू किया। मेहनत और हुनर के दम पर जल्द ही बड़े प्रोजेक्ट्स मिलने लगे।

ओमान में उनके काम की खासियत यह थी कि वे राजसी इमारतों के इंटीरियर में योगदान देते थे। सबसे प्रमुख है सुल्तान कबूस ग्रैंड मस्जिद का निर्माण कार्य, जहां उनकी कंपनी ने इंटीरियर और डेकोरेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा संभाला। यह मस्जिद ओमान की सबसे बड़ी और भव्य मस्जिदों में से एक है, जिसकी क्षमता 20 हजार से ज्यादा नमाजियों की है। इसके अलावा अल बुस्तान पैलेस जैसे लग्जरी होटल और पैलेस में भी उनका काम देखा जा सकता है। इन परियोजनाओं ने उन्हें ओमान के शाही परिवार और बड़े कारोबारियों का भरोसा दिलाया।

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ओमान में सफलता मिलने के बाद मेनन ने 1995 में भारत लौटकर शोभा डेवलपर्स (अब शोभा लिमिटेड) की नींव रखी। कंपनी ने बेंगलुरु, चेन्नई, कोच्चि, पुणे, गुरुग्राम समेत कई शहरों में रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स शुरू किए। शोभा की खासियत क्वालिटी, टाइमलाइन पर डिलीवरी और इंजीनियरिंग में सटीकता रही है। कंपनी ने Infosys कैंपस जैसे बड़े कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट्स में भी योगदान दिया।

आज शोभा लिमिटेड भारत की टॉप रियल एस्टेट कंपनियों में शामिल है। कंपनी 12 राज्यों में सक्रिय है और हजारों परिवारों को घर मुहैया करा चुकी है। हाल के आंकड़ों के अनुसार कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन 14,789 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच चुकी है, जबकि कुल बिजनेस वैल्यूएशन 20-25 हजार करोड़ रुपये के बीच मानी जाती है। मेनन की नेट वर्थ अरबों में है और वे भारत के सफलतम उद्यमियों में गिने जाते हैं।

मेनन की सफलता की कुंजी रही उनकी ईमानदारी, मेहनत और डिजाइन पर फोकस। ओमान में मुस्लिम बहुल देश में हिंदू उद्यमी के रूप में उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता का उदाहरण पेश किया। सुल्तान कबूस मस्जिद जैसे पवित्र स्थल के निर्माण में योगदान देकर उन्होंने साबित किया कि कारोबार सीमाओं और धर्म से परे होता है।

उनकी कहानी लाखों भारतीयों के लिए प्रेरणा है जो सपनों को हकीकत में बदलना चाहते हैं। 50 रुपये से शुरू करके उन्होंने दिखाया कि सच्ची लगन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और प्रेरक सफलता की कहानी पर आधारित है। इसमें व्यक्तिगत वित्तीय आंकड़े अनुमानित हैं और बाजार में उतार-चढ़ाव के अनुसार बदल सकते हैं।

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