“भारत के कानून मंत्रालय ने अमेरिकी SEC के समन को दो बार अस्वीकार किया, मुख्य वजहें हैं हस्ताक्षर और आधिकारिक मुहर की कमी; SEC अब ईमेल के जरिए समन भेजने की अदालती मंजूरी मांग रहा है; मामला $265 मिलियन ब्राइबरी से जुड़ा है, जिसमें गौतम अदाणी और सागर अदाणी शामिल हैं।”
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी से जुड़े अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के समन को भारत के कानून मंत्रालय ने दो बार खारिज कर दिया है। इस फैसले ने मामले में नया मोड़ ला दिया है, जहां SEC अब अमेरिकी अदालत से ईमेल के माध्यम से समन भेजने की अनुमति मांग रहा है। कानून मंत्रालय की ओर से दी गई वजहें पूरी तरह प्रक्रियागत हैं, जो हेग कन्वेंशन के नियमों पर आधारित हैं।
पहली अस्वीकृति में मंत्रालय ने कहा कि समन पर हस्ताक्षर स्याही से नहीं किए गए थे और आधिकारिक मुहर भी गायब थी। दूसरी बार, मई 2025 में दोबारा सबमिट किए गए अनुरोध में भी कवर लेटर की कमी को वजह बताया गया। मंत्रालय का तर्क है कि हेग सर्विस कन्वेंशन के तहत मॉडल फॉर्म पर मुहर और कवर लेटर जरूरी नहीं होते, लेकिन अमेरिकी दस्तावेजों में ये कमियां पाई गईं। इससे SEC को भारतीय सरकारी चैनल से समन सर्व करने में बाधा आई है।
मामला अदाणी ग्रीन एनर्जी और Azure Power से जुड़े $265 मिलियन ब्राइबरी स्कैंडल से संबंधित है, जहां आरोप है कि अदाणी अधिकारियों ने अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को एंटी-ब्राइबरी नियमों के पालन के बारे में गुमराह किया। SEC का दावा है कि सोलर प्रोजेक्ट्स में भारतीय अधिकारियों को रिश्वत दी गई, जिससे निवेशकों को गलत जानकारी मिली। गौतम अदाणी पर व्यक्तिगत रूप से आरोप हैं कि उन्होंने इन गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद चुप्पी साधी।
अदाणी ग्रुप ने स्पष्ट किया है कि कंपनी पर कोई आरोप नहीं हैं और ये सिर्फ व्यक्तिगत मामलों से जुड़े हैं। ग्रुप ने कहा कि वे सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं और कोई गलत कार्य नहीं किया गया। सागर अदाणी ने Hecker Fink LLP को हायर किया है, जबकि गौतम अदाणी ने Kirkland & Ellis LLP और Quinn Emanuel Urquhart & Sullivan LLP जैसी फर्मों की सेवाएं ली हैं।
मामले की समयरेखा:
| तारीख/घटना | विवरण |
|---|---|
| नवंबर 2024 | SEC ने पहली बार समन सर्व करने का अनुरोध भारत को भेजा। |
| दिसंबर 2024 | कानून मंत्रालय ने अस्वीकार किया, वजह: स्याही हस्ताक्षर और मुहर की कमी। |
| मई 2025 | SEC ने दोबारा अनुरोध सबमिट किया, हेग कन्वेंशन के नियम स्पष्ट किए। |
| जुलाई 2025 | दूसरी अस्वीकृति, कवर लेटर न होने का हवाला। |
| जनवरी 2026 | SEC ने अमेरिकी अदालत में ईमेल सर्विस की मंजूरी मांगी। |
इस घटनाक्रम से भारत-अमेरिका कानूनी सहयोग पर सवाल उठे हैं, खासकर जब मामला उच्च-प्रोफाइल कारोबारी से जुड़ा हो। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रक्रियागत कमियां जानबूझकर नहीं थीं, लेकिन इनसे देरी हुई है। SEC का ईमेल रूट अपनाना एक वैकल्पिक तरीका है, जो फेडरल रूल्स ऑफ सिविल प्रोसीजर के रूल 4(f)(3) के तहत संभव है।
प्रभावित क्षेत्र और आर्थिक प्रभाव:
शेयर बाजार: अदाणी ग्रुप के शेयरों में 2-3% की गिरावट देखी गई, लेकिन रिकवरी तेज रही। अदाणी ग्रीन एनर्जी का मार्केट कैप $20 बिलियन से ऊपर बना हुआ है।
निवेशक विश्वास: अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में चिंता, लेकिन भारतीय रेगुलेटर्स SEBI ने कोई अतिरिक्त जांच नहीं शुरू की।
सोलर सेक्टर: भारत के सोलर प्रोजेक्ट्स में $1 ट्रिलियन निवेश लक्ष्य पर असर, जहां अदाणी 45 GW क्षमता का दावा करता है।
कानूनी चुनौतियां: अगर ईमेल समन मंजूर होता है, तो अदाणी को 21 दिनों में जवाब देना होगा, अन्यथा डिफॉल्ट जजमेंट का खतरा।
कानून मंत्रालय की सख्ती हेग कन्वेंशन के अनुच्छेद 3 और 5 पर आधारित है, जहां दस्तावेज की वैधता सुनिश्चित करना जरूरी है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ये कमियां तकनीकी हैं और मुख्य मुद्दे से ध्यान हटाती हैं। मामले में आगे की सुनवाई फरवरी 2026 में हो सकती है, जहां अदालत ईमेल सर्विस की वैधता पर फैसला लेगी।
मुख्य आरोपों का ब्रेकडाउन:
ब्राइबरी स्कीम: Azure Power के साथ मिलकर भारतीय अधिकारियों को $265 मिलियन रिश्वत दी गई, सोलर कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने के लिए।
गुमराह निवेशक: अदाणी ने FCPA (Foreign Corrupt Practices Act) के उल्लंघन को छिपाया, जिससे बॉन्ड इश्यू में $250 मिलियन जुटाए गए।
व्यक्तिगत भूमिका: गौतम अदाणी को स्कीम की जानकारी थी, लेकिन रिपोर्ट नहीं की; सागर अदाणी डायरेक्ट इन्वॉल्व्ड।
संभावित सजा: अगर दोषी पाए गए, तो जुर्माना $100 मिलियन से अधिक और जेल की सजा संभव।
भारतीय कोण: भारत में PMLA और CBI जांच संभव, लेकिन अभी कोई कदम नहीं।
अदाणी ग्रुप ने इन आरोपों को आधारहीन बताया और कहा कि सभी ट्रांजेक्शन ट्रांसपेरेंट थे। ग्रुप की ओर से जारी बयान में जोर दिया गया कि Azure Power के साथ साझेदारी मानक प्रक्रियाओं पर आधारित थी। इस बीच, SEC की फाइलिंग से पता चला कि अदाणी ने अमेरिकी लॉ फर्मों से सलाह ली है, जो मामले की गंभीरता दर्शाती है।
संभावित परिणाम:
अगर समन सर्व होता है, तो अदाणी को अमेरिकी अदालत में पेश होना पड़ेगा, जो उनकी वैश्विक छवि पर असर डालेगा।
भारत सरकार की भूमिका: मंत्रालय का फैसला संप्रभुता की रक्षा करता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर सवाल।
कारोबारी प्रभाव: अदाणी पोर्ट्स और SEZ प्रोजेक्ट्स पर निवेशकों की नजर, जहां $10 बिलियन इन्वेस्टमेंट पाइपलाइन में है।
बाजार ट्रेंड: सोलर एनर्जी सेक्टर में 15% ग्रोथ预期, लेकिन ऐसे स्कैंडल्स से रेगुलेटरी स्क्रूटनी बढ़ेगी।
यह विकास अदाणी साम्राज्य के लिए चुनौतीपूर्ण है, जहां ग्रुप की कुल वैल्यू $200 बिलियन से ऊपर है। कानूनी विशेषज्ञों का अनुमान है कि मामला लंबा खिंचेगा, लेकिन प्रक्रियागत बाधाएं जल्द सुलझ सकती हैं।
Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है और कानूनी सलाह नहीं है। पाठक स्वतंत्र रूप से जांच करें।