“चांदी की कीमतों में अचानक ₹11,000 से ₹15,000 तक की गिरावट देखी गई है, जो मुख्य रूप से मुनाफावसूली, मजबूत डॉलर और वैश्विक अनिश्चितताओं से प्रभावित है। चीन की सख्त निर्यात नीति के बावजूद बाजार में भारी बिकवाली से हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबी अवधि में सप्लाई डेफिसिट के कारण रिकवरी संभव है।”
चांदी में भारी गिरावट: बाजार में हाहाकार
भारतीय सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। एमसीएक्स पर चांदी प्रति किलोग्राम ₹11,000 से अधिक लुढ़ककर ₹2,67,000 के आसपास पहुंच गई, जबकि कुछ रिपोर्टों में ₹2,70,500 तक का स्तर देखा गया। दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी ₹7,400 से ₹15,000 तक गिरी, जो पिछले कुछ दिनों की तेजी के बाद मुनाफावसूली का नतीजा है।
यह गिरावट वैश्विक स्तर पर चांदी के भाव में आई गिरावट से जुड़ी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी $87-88 प्रति औंस के स्तर पर ट्रेड कर रही है, जो हाल के उच्च स्तरों से काफी नीचे है। पिछले कुछ हफ्तों में चांदी ने $90 से ऊपर का स्तर छुआ था, लेकिन अब भारी करेक्शन देखा जा रहा है।
चीन के फैसले का असर चीन ने 1 जनवरी 2026 से चांदी को रणनीतिक सामग्री घोषित करते हुए निर्यात पर सख्त लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू की है। चीन वैश्विक रिफाइंड चांदी का 60-70% नियंत्रित करता है। इस फैसले से पहले चांदी की कीमतों में उछाल आया था, क्योंकि सप्लाई में कमी की आशंका बढ़ गई थी। लेकिन अब बाजार में चीन से जुड़ी लिक्विडेशन और स्पेकुलेटिव पोजीशंस की अनवाइंडिंग से दबाव बढ़ा है।
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि चीनी बाजार में लीवरेज्ड पोजीशंस की भारी बिकवाली हुई, जिससे कीमतें अचानक टूटीं। वैश्विक स्तर पर चांदी की मांग इंडस्ट्रियल सेक्टर (सोलर, ईवी, इलेक्ट्रॉनिक्स) से मजबूत है, लेकिन शॉर्ट टर्म में मुनाफावसूली और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने दबाव बनाया।
शहरवार चांदी के भाव (26 फरवरी 2026)
(नोट: भाव लोकल टैक्स और मेकिंग चार्जेस के साथ अलग-अलग हो सकते हैं।)
| शहर | प्रति किलोग्राम (₹) | प्रति 10 ग्राम (₹) | बदलाव (पिछले से) |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | 2,70,500 | 2,705 | -7,400 |
| मुंबई | 2,66,000-2,70,000 | 2,660-2,700 | -10,000+ |
| चेन्नई | 2,85,000-2,90,000 | 2,850-2,900 | फ्लैट/माइल्ड डाउन |
| कोलकाता | 2,70,000 | 2,700 | -8,000 |
| बेंगलुरु | 2,69,000 | 2,690 | -6,000 |
एक्सपर्ट्स की राय और आगे का अनुमान एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह गिरावट शॉर्ट टर्म करेक्शन है। 2026 में ग्लोबल चांदी की डिमांड 1.05 बिलियन औंस तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि सप्लाई सिर्फ 1.5% बढ़कर 1.05 बिलियन औंस रहेगी। इंडस्ट्रियल डिमांड (सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल) में 6वें साल डेफिसिट जारी रहने से लंबी अवधि में कीमतें मजबूत रह सकती हैं।
जेपी मॉर्गन जैसे संस्थानों ने औसत $81 प्रति औंस का अनुमान लगाया है, जो 2025 के औसत से दोगुना है। भारत में निवेशकों के लिए यह स्तर खरीदारी का मौका हो सकता है, लेकिन वोलेटिलिटी बनी रहेगी। अमेरिका-ईरान वार्ता, ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी और फेड की ब्याज दरें बाजार को प्रभावित करेंगी।
यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या इंडस्ट्रियल डिमांड और मजबूत होती है, तो चांदी जल्दी रिकवर कर सकती है। फिलहाल निवेशक सतर्क रहें और लॉन्ग टर्म होल्डिंग पर फोकस करें।
Disclaimer: यह समाचार और विश्लेषण बाजार की वर्तमान स्थितियों पर आधारित है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।