‘बिना इजाजत देश नहीं छोड़ूंगा’, ₹40,000 करोड़ के बैंक फ्रॉड केस में अनिल अंबानी का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा हलफनामा; जानिए पूरा मामला

“रिलायंस एडीएजी ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर वचन दिया है कि वे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने अपनी भूमिका को गैर-कार्यकारी निदेशक तक सीमित बताया और जांच में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। यह कदम ₹40,000 करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में जांच एजेंसियों की जांच पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद आया है, जिसमें ईडी और सीबीआई शामिल हैं। अंबानी ने जुलाई 2025 से देश न छोड़ने का भी उल्लेख किया।”

अनिल अंबानी का हलफनामा और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में अनिल अंबानी ने स्पष्ट किया कि वे फ्लाइट रिस्क नहीं हैं और कानूनी प्रक्रिया से बचने का कोई इरादा नहीं रखते। उन्होंने कहा, “मैंने जुलाई 2025 से, जब वर्तमान जांच शुरू हुई, देश नहीं छोड़ा है और फिलहाल विदेश जाने का कोई प्लान या इरादा नहीं है। यदि कभी विदेश यात्रा की आवश्यकता पड़े तो मैं अदालत से पूर्व अनुमति लूंगा।”

अंबानी ने अपनी भूमिका को लेकर भी विस्तार से बताया कि संबंधित कंपनियों में वे केवल non-executive director थे। दैनिक प्रबंधन या संचालन में उनकी कोई भागीदारी नहीं थी। यह हलफनामा मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश किया गया, जहां उनके वकील मुकुल रोहतगी ने पहले भी मौखिक आश्वासन दिया था।

₹40,000 करोड़ का कथित बैंक फ्रॉड क्या है?

यह मामला मुख्य रूप से Reliance Communications Ltd (RCOM) और Anil Dhirubhai Ambani Group (ADAG) की अन्य कंपनियों से जुड़ा है। आरोप है कि सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों से लिए गए बड़े कर्ज में धोखाधड़ी हुई, जिसकी राशि करीब ₹40,000 करोड़ बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि अपराध से अर्जित आय ₹20,000 करोड़ से अधिक हो सकती है।

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ईडी ने PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत कई ECIR दर्ज किए हैं। अब तक एजेंसी ने करीब ₹12,000 करोड़ की संपत्तियां अटैच की हैं। यह जांच जुलाई 2025 से तेज हुई, जब सुप्रीम कोर्ट ने ईडी और सीबीआई से जांच में देरी पर सवाल उठाए और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और जांच एजेंसियों पर फटकार

दो सप्ताह पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय एजेंसियों को फटकार लगाई थी कि इतनी बड़ी राशि के मामले में जांच में अनावश्यक देरी क्यों हो रही है। कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक धन से जुड़े इस घोटाले में सभी preventive steps उठाए जाएं, ताकि कोई आरोपी देश छोड़कर न भाग सके। लुकआउट सर्कुलर पहले से जारी हैं।

अंबानी के हलफनामे के बाद कोर्ट ने उनकी ओर से सहयोग और देश न छोड़ने के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया। यह कदम जांच को और मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

मामले से जुड़े प्रमुख तथ्य

कंपनियां शामिल : Reliance Communications Ltd (RCOM), Reliance Telecom Ltd और ADAG ग्रुप की अन्य इकाइयां।

प्रमुख आरोप : बैंक लोन में फ्रॉड, फंड सायफनिंग और मनी लॉन्ड्रिंग।

जांच एजेंसियां : Enforcement Directorate (ED), Central Bureau of Investigation (CBI)।

संपत्ति अटैचमेंट : ₹12,000 करोड़ तक की संपत्तियां कुर्क।

अनिल अंबानी की स्थिति : पूर्व प्रमोटर, अब गैर-कार्यकारी भूमिका का दावा; व्यक्तिगत insolvency proceedings भी चल रहे हैं।

अन्य विकास : अनिल अंबानी की पत्नी टीना अंबानी को भी ED ने पूछताछ के लिए तलब किया था, लेकिन पेश नहीं हुईं।

वर्तमान स्थिति

अंबानी ने जांच में पूरा सहयोग देने का वादा किया है। ईडी और सीबीआई अब SIT के माध्यम से जांच तेज कर रही हैं। मामला बैंक फ्रॉड, कॉरपोरेट गवर्नेंस और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़ा होने के कारण काफी संवेदनशील है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही यह जांच भविष्य में कई बड़े फैसले ला सकती है।

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Disclaimer : यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और अदालती दस्तावेजों पर आधारित है। यह किसी भी पक्ष की पुष्टि या खंडन नहीं करता। कानूनी मामलों में अंतिम फैसला अदालत द्वारा किया जाता है।

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