उज़्बेकिस्तान ने जनवरी में सबसे ज्यादा सोना खरीदा, चीन-अमेरिका को पीछे छोड़ा; बेचने वाले देशों में कौन आगे?

“जनवरी 2026 में वैश्विक सेंट्रल बैंकों ने कुल मात्र 5 टन सोना नेट खरीदा, जो 2025 के मासिक औसत 27 टन से 82% कम है। लेकिन उज़्बेकिस्तान ने 9 टन सोना खरीदकर सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा, जिससे उसके कुल सोने के भंडार 391 टन से अधिक हो गए और यह उसके अंतरराष्ट्रीय भंडार का 82% बन गया। चीन ने 5 टन, जबकि अन्य जैसे मलेशिया, चेक गणराज्य और इंडोनेशिया ने भी खरीदारी की। वहीं कुछ देशों ने बिकवाली की, लेकिन कुल मिलाकर भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने की मांग बनी हुई है।”

जनवरी में उज़्बेकिस्तान बना वैश्विक सोना खरीद का चैंपियन

विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के पहले महीने में सेंट्रल बैंकों की सोना खरीदारी में उल्लेखनीय गिरावट आई है। कुल नेट खरीद मात्र 5 टन रही, जो पिछले साल के औसत से काफी कम है। लेकिन इस कमजोर माहौल में भी एक मुस्लिम देश ने बाजी मारी।

उज़्बेकिस्तान के सेंट्रल बैंक ने जनवरी में 9 टन शुद्ध सोना खरीदा। यह खरीदारी अक्टूबर 2025 से जारी उसके लगातार संचय का हिस्सा है। इससे देश के कुल सोने के भंडार में इजाफा होकर अब यह 391 टन से ऊपर पहुंच गया है। सोना अब उज़्बेकिस्तान के कुल अंतरराष्ट्रीय भंडार का 82% हिस्सा बन चुका है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे ऊंचे अनुपातों में से एक है।

यह खरीदारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं और कई सेंट्रल बैंक छुट्टियों व अस्थिरता के कारण सतर्क रहे। लेकिन उज़्बेकिस्तान ने अपनी रणनीति जारी रखी, जो आर्थिक स्थिरता और विविधीकरण पर केंद्रित है।

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अन्य प्रमुख खरीदार कौन?

चीन के पीपुल्स बैंक ने 5 टन सोना जोड़ा। यह उसकी लगातार खरीदारी का हिस्सा है, हालांकि जनवरी में यह उज़्बेकिस्तान से पीछे रहा।

मलेशिया के बैंक ने 3 टन खरीदा, जो 2018 के बाद उसकी पहली नेट खरीदारी है।

चेक गणराज्य और इंडोनेशिया ने 2-2 टन खरीदा।

सर्बिया ने 1 टन जोड़ा।

कुल मिलाकर, एशिया और पूर्वी यूरोप के सेंट्रल बैंक सक्रिय रहे। नई संस्थाओं का प्रवेश दिखता है, जैसे मलेशिया और संभावित रूप से कोरिया, जो 2013 के बाद पहली बार सोना खरीदने की तैयारी में हैं।

बेचने वाले देशों की स्थिति

जनवरी में कुल खरीद कम होने की वजह कुछ बिकवालियां भी रहीं।

कजाकिस्तान ने 1 टन नेट बेचा, हालांकि यह छोटी मात्रा है और उसका कुल संचय पिछले साल मजबूत रहा।

बुल्गारिया ने 2 टन बेचा।

कुछ अन्य छोटे समायोजन हुए।

लेकिन बड़े पैमाने पर बिकवाली नहीं हुई। वैश्विक स्तर पर 2025 में सेंट्रल बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा था, जो ऐतिहासिक रूप से ऊंचा है, हालांकि 2024 के 1,000+ टन से कम। पोलैंड सबसे बड़ा खरीदार रहा (102 टन), उसके बाद कजाकिस्तान (57 टन)।

क्यों बढ़ रही है मुस्लिम देशों की सोना खरीदारी?

उज़्बेकिस्तान जैसे देश सोने को डॉलर पर निर्भरता कम करने और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। तुर्की, कतर, यूएई और सऊदी अरब जैसे अन्य मुस्लिम देशों ने भी पिछले वर्षों में सोना बढ़ाया है। उदाहरण:

तुर्की के सेंट्रल बैंक के सोने के भंडार जनवरी अंत में बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे, कुल रिजर्व $218 बिलियन से अधिक।

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यूएई ने 2025 में सोने के भंडार में 65% की वृद्धि की।

यह ट्रेंड दिखाता है कि उभरते बाजार सोने को सुरक्षित संपत्ति मान रहे हैं, खासकर जब वैश्विक तनाव जारी है।

वैश्विक सोना बाजार पर असर

जनवरी की कम खरीदारी के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में भी सेंट्रल बैंक खरीदारी जारी रहेगी। भू-राजनीतिक अनिश्चितता, मुद्रास्फीति और डॉलर से दूर होने की कोशिशें सोने की मांग बनाए रखेंगी। उज़्बेकिस्तान जैसी खरीदारी इस बात का संकेत है कि मांग का आधार व्यापक हो रहा है, जो लंबे समय में सोने की कीमतों को समर्थन देगा।

तालिका: जनवरी 2026 में प्रमुख सेंट्रल बैंक सोना बदलाव (टन में)

देश/बैंकखरीद/बिक्री (टन)कुल भंडार (लगभग)टिप्पणी
उज़्बेकिस्तान+9391+सबसे बड़ा खरीदार
चीन+5लगातार खरीदारी
मलेशिया+32018 के बाद पहली
चेक गणराज्य+2
इंडोनेशिया+2
कजाकिस्तान-1छोटी बिकवाली
बुल्गारिया-2
कुल नेट+52025 औसत से 82% कम

यह डेटा दिखाता है कि उज़्बेकिस्तान ने न सिर्फ चीन-अमेरिका को पीछे छोड़ा, बल्कि वैश्विक ट्रेंड में नया उदाहरण पेश किया है।

Disclaimer: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट्स और आंकड़ों पर आधारित है। निवेश संबंधी कोई सलाह नहीं। बाजार जोखिम भरे होते हैं।

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